नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने आखिरकार इस साल CBSE 12वीं की परीक्षा भी रद्द कर दी। 1 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक मीटिंग में यह फैसला किया गया। लंबे समय से स्टूडेंट्स और पैरेंट्स इसकी मांग कर रहे थे। दिल्ली समेत कुछ राज्य सरकारों ने भी 12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द करने की मांग की थी। इससे पहले 10वीं के एग्जाम भी रद्द कर दिए गए थे।
मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी छात्रों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता में है। ऐसे माहौल में उन्हें परीक्षा का तनाव देना ठीक नहीं है। हम उनकी जान खतरे में नहीं डाल सकते। उन्होंने कहा कि 12वीं का रिजल्ट तय समय सीमा के भीतर और तार्किक आधार पर तैयार किया जाएगा।
बैठक में मोदी को तमाम राज्यों और हितधारकों से मिले सुझावों एवं व्यापक विचार विमर्श से निकल रहे विभिन्न विकल्पों के बारे में बताया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई मीटिंग में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, धर्मेन्द्र प्रधान, निर्मला सीतारमण मौजूद थे। इसके अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हुए।
PM Modi की बैठक की जरूरी बातें
छात्रों के हित को ध्यान में रखकर ही 12वीं की परीक्षा पर फैसला लिया गया है। छात्रों की सुरक्षा और सेहत हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। परीक्षा को लेकर छात्र, पैरेंट्स और टीचर्स सभी परेशान थे। इस फिक्र को खत्म किया जाना जरूरी था। ऐसे दबाव भरे माहौल में छात्रों को परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जाना ठीक नहीं होगा। परीक्षा से जुड़े सभी पक्षों को इस समय छात्रों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।
अब सवाल कि कैसे बनेगा रिजल्ट
सीबीएसई क्लास 12 एग्जाम कैंसिल होने के बाद अब अहम सवाल यही है कि स्टूडेंट्स को मार्क्स किस आधार पर मिलेंगे और रिजल्ट कैसे बनेगा? केंद्र व सीबीएसई ने कहा है कि समय के अनुसार उचित क्राइटेरिया के तहत मार्किंग की जाएगी और रिजल्ट तैयार होगा। वहीं स्टूडेंट्स को पिछली बार की तरह परीक्षा देने का विकल्प भी दिया जाएगा। जो स्टूडेंट्स अपने मार्क्स से संतुष्ट नहीं होंगे वे बाद में एग्जाम देने का विकल्प चुन सकेंगे।
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छात्रों ने लिखी थी चीफ जस्टिस को चिट्ठी
3 हजार छात्रों ने परीक्षाओं को लेकर करीब एक हफ्ते पहले चीफ जस्टिस एनवी रमना को चिट्ठी लिखी थी। कहा था, ‘कोरोना के बीच फिजिकल एग्जाम कराने का CBSE का फैसला रद्द कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट असेसमेंट का वैकल्पिक तरीका तय करने का निर्देश दे। देश में कोविड-19 के चलते कई स्टूडेंट्स ने अपने परिवार वालों को खोया है। ऐसे में इस समय फिजिकली परीक्षा कराना न सिर्फ लाखों छात्रों और टीचर्स की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि उनके परिवार वालों के लिए भी यह परेशानी का सबब है।’
