नई दिल्ली
राजस्थान कांग्रेस में छिड़ा सियासी संग्राम लगातार बढ़ता जा रहा है। राजस्थान कांग्रेस में मचे इसी घमासान के बीच पूर्व पीसीसी चीफ और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट (Sachin Pilot) आखिर 6 दिन बाद प्रियंका-राहुल से बिना मिले दिल्ली से जयपुर लौट आए। बताया जा रहा है कि प्रियंका-राहुल ने उनको मिलने का समय नहीं दिया। सचिन दिल्ली में करीब 6 दिन तक डेरा डाले रहे। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी हाईकमान ने सचिन पायलट को साफ शब्दों में मैसेज दे दिया है कि राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने रहेंगे और उन्हीं के नेतृत्व में सब कुछ होगा। इससे अब ऐसा लगा रहा है राजस्थान कांग्रेस में आरपार का घमासान तय है।
अशोक गहलोत की दो टूक
इस बीच ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी अजय माकन की ओर से आए जल्द मंत्रिमंडल विस्तार के बयान के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आलाकमान से भी दो टूक कह दिया है कि ये काम वे अपनी सुविधा के मुताबिक ही करेंगे। सूत्रों ने बताया कि अब अशोक गहलोत कांग्रेस आलाकमान की भी नहीं सुन रहे। उन्होंने कोरोना की रफ्तार थमने के बावजूद खुद को quarantine कर आलाकमान को साफ संकेत दे दिया कि राजस्थान में वे अपने हिसाब से सरकार और संगठन को चलाएंगे।
एक साल से चल रहा है सियासी संघर्ष
आपको बता दें राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सियासी संकट एक साल से चल रहा है। कांग्रेस से बगावत के पिछले एपिसोड में भी गहलोत के सख्त रवौये के कारण सचिन पायलट को पीछे हटाना पड़ा था और आलाकमान ने दोनों के बीच समझौता कराकर एअक सुलह कमेटी बना दी थी। दरअसल सचिन पायलट की नाराजगी इसी बात को लेकर है कि इस सुलह कमेटी की रिपोर्ट दस माह बाद भी क्यों नहीं आई। नाराज सचिन इसी बात को लेकर दिल्ली में प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मिलने चले गए। पर प्रियंका-राहुल ने 6 दिन तक इंतजार करने के बाद भी सचिन को मिलने का समय नहीं दिया। सचिन पायलट की मांग है कि सरकार में 9 मंत्री के पद खाली हैं और उनके समर्थक विधायकों को मंत्रिमंडल में और सरकारी नियुक्ति में जगह दी जाए।
बताया जाता है कि गहलोत के दबाव के कारण सचिन से गांधी फैमिली ने मुलाकात नहीं की। इस बीच दोनों ही गुटों की ओर से तीखी बयानबाजी शुरू हो गई। सचिन पायलट को पूरी उम्मीद थी कि पार्टी आलाकमान के साथ प्रियंका गांधी से उनकी मुलाकात होगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पार्टी आलाकमान के ओर से सचिन को यह साफ़ संकेत दिया गया बताया कि अभी उनकी कोई मांग नहीं मानी जाएगी। उन्हें आगे मुख्यमंत्री बनने का मौका मिलेगा।
जयपुर पहुंचे सचिन
सचिन पायलट दोपहर में अपने दिल्ली स्थित 5 कैनिंग लेन आवास से जयपुर के लिए रवाना होकर शाम को जयपुर पहुंचे। पायलट से कई नेताओं ने मुलाकात भी की।विराटनगर से विधायक इन्द्राज गुर्जर ने पायलट से मुलाकात कर विचार विमर्श किया। बाद में गुर्जर ने कहा कि सचिन पायलट जो भी फैसला लेंगे हम उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि गद्दार किसे बोला जा रहा है?, हम लोग तो पूरी निष्ठा के साथ कांग्रेस के साथ है। गुर्जर ने कहा कि हम पर वे ऐसे लोग आरोप लगा रहे है जो खुद कभी भाजपा तो कभी बसपा के साथ रहे है। ऐसे में सबको पता है कि गद्दार कौन नेता है और कौन नहीं है।
गहलोत-डोटासरा की चुप्पी
इस पूरे सियासी घटनाक्रम और हो रही बयानबाजी पर मुख्य़मंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की रहस्यमयी चुप्पी कांग्रेस के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चा इस बात की है कि कांग्रेस की सियासत में इतना बड़ा घटनाक्रम चल रहा है लेकिन न तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और न ही पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा सियासी बयानबाजी पर रोक लगाने के लिए आगे आए हैं, और न ही उनकी तरफ से मामले को शांत कराने के लिए कोई बयान जारी किया गया है। गहलोत कैंप के कांग्रेस विधायकों ने भी पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है। अभी तक गहलोत कैंप के कांग्रेस विधायकों में से किसी का भी यह बयान सामने नहीं आया है जबकि गहलोत कैंप के ही माने जाने वाले बसपा, आरएलडी और निर्दलीय विधायकों ने सचिन पायलट कैंप के विधायकों की ओर से की जा रही बयानबाजी का जवाब दिया है।
(खबर लगातार अपडेट हो रही है)
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पंजाब की तर्ज पर समाधान चाहते थे सचिन
पायलट खेमे को उम्मीद थी कि जिस तरह पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू को सुना गया उसी तर्ज पर सचिन पायलट की बात को भी सुना जाएगा, लेकिन अभी तक कांग्रेस हाईकमान की तरफ से किसी तरह के संकेत नहीं मिले हैंं। अब इस पूरे मसले पर सचिन पायलट के रुख का इंतजार है। पायलट अब जयपुर में समर्थक विधायकों से मिलकर आगे रणनीति बनाएंगे।
