मुम्बई
भाजपा के मास्टर स्ट्रोक ने महाराष्ट्र की राजनीति को गुरूवार शाम होते – होते क्लाइमेक्स पर पहुंचा दिया। भाजपा ने उद्धव ठाकरे से बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री के रूप में पेश कर सब को चौंका दिया। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने इसका ऐलान किया। पहले देवेंद्र फडणवीस के सीएम पद की शपथ लेने की खबरें आई थीं। लेकिन भाजपा ने अंतिम क्षणों में मास्टर स्ट्रोक खेल दिया। पहले उनको फडणवीस के साथ डिप्टी सीएम के तौर पर पेश किया गया था। इसके साथ ही 20 जून को शुरू हुई महाराष्ट्र की राजनीतिक उठा-पटक एक चैप्टर आज क्लाइमेक्स पर पहुंच कर क्लोज हो गया। कल उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद से ही कयास लग रहे थे देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले खबरें थीं कि फडणवीस कल शुक्रवार को सीएम पद संभाल सकते हैं। लेकिन अब एकनाथ शिंदे का CM बनने का ऐलान हो गया है।
देवेंद्र फडणवीस नए डिप्टी सीएम
राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) ने एकनाथ शिंदे को सीएम पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। वहीं बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) पद की शपथ ग्रहण की है। मीडिया रिपोर्ट्स हैं कि देवेंद्र फडणवीस के सरकार से बाहर रहने के फैसले पर भाजपा हाईकमान तैयार नहीं था। किसी तरह उन्हें शिंदे कैबिनेट में शामिल होने के लिए मनाया गया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कंफर्म किया कि देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के नए डिप्टी सीएम होंगे।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को अपनी प्रेस कांफ्रेंस में खुद मुख्यमंत्री न बनकर शिवसेना के बागी एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाए जाने की घोषणा करके सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया। लोग तो लोग, भाजपा के विधायक तक इस बात से हतप्रभ थे कि जिस कुर्सी के लिए भाजपा ने शिवसेना से गठबंधन तोड़ लिया था, आज वो कुर्सी सामने है और फडणवीस उसपर बैठने से इनकार कर रहे हैं। इस ऐलान के बाद शिंदे के समर्थक खुशी से झूम उठे हैं। वे विधान भवन के बाहर जश्न मना रहे हैं।
नड्डा ने फडणवीस को मनाया
जेपी नड्डा ने ट्वीट किया, “एकनाथ शिंदे जी और देवेंद्र फडणवीस जी को बधाई। आज ये सिद्ध हो गया कि भाजपा के मन में कभी मुख्यमंत्री पद की लालसा नहीं थी। 2019 के चुनाव में स्पष्ट जनादेश नरेंद्र मोदी जी एवं देवेंद्र जी को मिला था। उद्धव ठाकरे ने सीएम पद के लालच में हमारा साथ छोड़कर विपक्ष के साथ सरकार बनाई थी।”
नड्डा ने कहा, “भाजपा ने महाराष्ट्र की जनता की भलाई के लिए बड़े मन का परिचय देते हुए एकनाथ शिंदे जी का समर्थन करने का निर्णय किया। श्री देवेन्द्र फडणवीस जी ने भी बड़े मन दिखाते हुए मंत्रिमंडल में शामिल होने का निर्णय किया है, जो महाराष्ट्र की जनता के प्रति उनके लगाव को दर्शाता है।”
एक कदम पीछे हट कर आगे कूदने की तैयारी
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा के लिए मुख्यमंत्री पद का बलिदान एक पीछे हटाने का कदम है। लेकिन दरअसल ये अपने कदमों को पीछे खींचकर आगे कूदने की तैयारी है। भाजपा इस एक फैसले से बहुत कुछ साधती नजर आ रही है। भाजपा का यह एक कदम कई सवालों, चिंताओं और संभावनाओं के उत्तर अपने अंदर समेटे हुए है।
भाजपा के लिए शिंदे को समर्थन देने का फैसला ढाई साल की राजनीतिक खींचतान में बिगड़ी छवि को सुधारने का महायज्ञ भी है और भविष्य में उससे फलीभूत होने की गारंटी भी। मुंबई शहर से लेकर महाराष्ट्र की सत्ता तक पहली बार भाजपा इतनी मजबूत और प्रभावी स्थिति में होगी। उसे किसी रिमोट का खतरा नहीं होगा। बल्कि इस बार रिमोट खुद भाजपा के हाथ में होगा।
इस बीच देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की और राज्य में सरकार गठन का दावा पेश किया। भाजपा के पास कुल 106 विधायक हैं। महाराष्ट्र में एनडीए के कुल विधायकों की संख्या 113 है। जबकि एकनाथ शिंदे ने भी शिवसेना के बागियों और निर्दलीय विधायकों समेत कुल 49 सदस्यों के समर्थन का दावा किया है। एक महीने पहले तक महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी गठबंधन सरकार, जिसमें शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी समेत कुल 169 विधायकों का समर्थन हासिल था।
आज ही एकनाथ शिंदे गोवा से मुंबई पहुंचे थे और फिर पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस के घर पर पहुंचे। इसके बाद दोनों एक साथ ही राज्यपाल से मिलने के लिए निकले। एकनाथ शिंदे गोवा से अकेले ही आए हैं, जबकि अन्य बागी विधायक अब भी वहां के ताज होटल में ठहरे हुए हैं।
आपको बता दें कि राज्यपाल की ओर से फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया गया था, जिसे शिवसेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के आदेश पर रोक लगाने से ही इनकार कर दिया। यह उद्धव ठाकरे और शिवसेना के लिए करारा झटका था। इसी के चलते सीएम उद्धव ठाकरे ने फेसबुक लाइव पर संबोधित करते हुए इस्तीफा दे दिया था। यही नहीं अपने भावुक भाषण में उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता भी छोड़ने का ऐलान कर दिया था।
दूसरे से पांचवे नंबर पर खिसकी शिवसेना
महाराष्ट्र के सियासी संग्राम के बीच शिवसेना अब राज्य में दूसरे से पांचवे नंबर पर खिसक गई है। राज्य के विधानसभा चुनाव के जब नतीजे आए थे तो शिवसेना भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी। लेकिन ढाई साल बाद अब शिवसेना के सिर्फ 16 विधायक बचे हैं। दरअसल शिवसेना के 39 विधायकों ने एकनाथ शिंदे की अगुवाई में अपना अलग गुट बना लिया है। ऐसे में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना पार्टी को मुख्य विरोधी नेता यानी विधानसभा का नेता प्रतिपक्ष पद भी नहीं मिल पाएगा। संख्या बल के हिसाब से देखें तो महाराष्ट्र विधानसभा में अब नेता प्रतिपक्ष की सीट एनसीपी के खाते में जाएगी।
महाराष्ट्र विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी भाजपा है, जिसके पास 106 विधायक हैं, वहीं दूसरे नंबर पर एनसीपी (54 विधायक), तीसरे नंबर पर कांग्रेस (44 विधायक), चौथे नंबर का गुट एकनाथ शिंदे गुट(39 विधायक) और पांचवे नंबर का दल शिवसेना है जिसके पास 16 विधायक बचे हैं।
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