केंद्र सरकार (Central government) ने डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (Dental Council of India) को भंग कर नेशनल डेंटल कमीशन (National Dental Commission) का गठन किया। 19 मार्च 2026 से लागू नई व्यवस्था दंत शिक्षा, संस्थानों के मूल्यांकन और पेशेवर मानकों को नया ढांचा देगी।
नई दिल्ली
देश में दंत चिकित्सा शिक्षा और डेंटिस्ट पेशे के नियमन में बड़ा बदलाव हो गया है। केंद्र सरकार ने नई व्यवस्था लागू करते हुए डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) को भंग कर दिया है और उसकी जगह नेशनल डेंटल कमीशन (NDC) का गठन कर दिया है।
सरकार की ओर से इस संबंध में अधिसूचना 19 मार्च 2026 को जारी की गई और उसी दिन से यह नई व्यवस्था लागू भी हो गई। इसे दंत शिक्षा और मौखिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
चुनाव नहीं, अब विशेषज्ञ चलाएंगे व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत अब नियामक ढांचा चुनाव आधारित नहीं रहेगा। इसकी जगह विशेषज्ञों द्वारा संचालित प्रणाली लागू की गई है, ताकि दंत शिक्षा और पेशेवर मानकों से जुड़े फैसले अधिक पेशेवर और प्रभावी ढंग से लिए जा सकें। सरकार का मानना है कि इससे दंत शिक्षा में पारदर्शिता बढ़ेगी और संस्थानों की गुणवत्ता पर अधिक सख्त निगरानी हो सकेगी।
तीन स्वायत्त बोर्ड करेंगे अलग-अलग काम
नेशनल डेंटल कमीशन के तहत तीन अलग-अलग स्वायत्त बोर्ड बनाए गए हैं, जो दंत शिक्षा और पेशे से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जिम्मेदारी संभालेंगे।
- अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डेंटल एजुकेशन बोर्ड – दंत शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा।
- डेंटल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड – डेंटल कॉलेजों का मूल्यांकन और मान्यता का काम देखेगा।
- पेशेवर मानक एवं पंजीकरण बोर्ड – दंत चिकित्सकों के रजिस्ट्रेशन और आचार संहिता की निगरानी करेगा।
आयोग के अध्यक्ष बने डॉ. संजय तिवारी
नई व्यवस्था के तहत आयोग और बोर्डों के नेतृत्व के लिए अनुभवी विशेषज्ञों को जिम्मेदारी दी गई है। सरकार ने डॉ. संजय तिवारी को नेशनल डेंटल कमीशन का अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि डॉ. मौसुमी गोस्वामी को अंशकालिक सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा विभिन्न बोर्डों में भी विशेषज्ञों की नियुक्ति की गई है।
ये होंगी आयोग की मुख्य जिम्मेदारियां
नेशनल डेंटल कमीशन को दंत शिक्षा और पेशे से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम सौंपे गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- दंत शिक्षा से जुड़े नियम और मानक तय करना
- डेंटल कॉलेजों का मूल्यांकन और मान्यता
- देश में दंत चिकित्सकों की जरूरत और मानव संसाधन का आकलन
- अनुसंधान को बढ़ावा देना
- निजी डेंटल कॉलेजों की फीस के लिए दिशा-निर्देश तय करना
इसके साथ ही सामुदायिक दंत स्वास्थ्य और पेशेवर नैतिकता के मानकों को भी निर्धारित किया जाएगा।
खत्म हुआ 1948 का कानून
इस नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही 1948 का डेंटिस्ट्स एक्ट भी समाप्त हो गया है और उसके तहत काम कर रही डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया औपचारिक रूप से भंग कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव देश में दंत चिकित्सा शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि आम लोगों को बेहतर और सुलभ मौखिक स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद भी बढ़ेगी।
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