रेलकर्मियों के लिए बड़ा बदलाव, अब पास बनवाने के लिए नहीं लगाने होंगे दफ्तरों के चक्कर | रेलवे बोर्ड ने खत्म की पुरानी व्यवस्था

रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों, पेंशनरों और दिव्यांग रेलकर्मियों के लिए पास और PTO जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी है। अब सभी पास केवल HRMS पोर्टल के माध्यम से जारी होंगे।

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नई दिल्ली 

भारतीय रेलवे ने अपने लाखों कर्मचारियों, पेंशनरों और दिव्यांग रेलकर्मियों के लिए पास जारी करने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब रेलवे पास और प्रिविलेज टिकट ऑर्डर (PTO) पूरी तरह डिजिटल माध्यम से जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही वर्षों से चली आ रही मैनुअल और प्रिंटेड पास बुक वाली व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला लिया गया है।

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रेलवे बोर्ड की ओर से जारी नई गाइडलाइन के अनुसार अब हर प्रकार का रेलवे पास केवल एचआरएमएस (Human Resource Management System) के जरिए ही बनाया और जारी किया जाएगा। इस संबंध में सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों, रेलवे उपक्रमों, IRCTC और CRIS को निर्देश भेज दिए गए हैं।

पास बुक का दौर खत्म, अब सब कुछ ऑनलाइन

अब तक कई मामलों में पास जारी करने के लिए पारंपरिक प्रक्रियाओं और पूर्व-मुद्रित पास बुक का उपयोग किया जाता था। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह पूरी प्रणाली इतिहास बन जाएगी।

रेलवे बोर्ड ने साफ कर दिया है कि भविष्य में किसी भी कर्मचारी, सेवानिवृत्त रेलकर्मी या आश्रित को मैनुअल प्रक्रिया के तहत पास जारी नहीं किया जाएगा। आवेदन से लेकर पास जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पूरी होगी।

2020 में शुरू हुआ था ई-पास सिस्टम

रेलवे बोर्ड के अनुसार ई-पास और पीटीओ मॉड्यूल वर्ष 2020 से संचालित है और पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। बाद में इसकी सुविधा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिलने वाले पूरक पास और मृत रेलकर्मियों के आश्रितों तक भी बढ़ा दी गई थी।

अब इसी व्यवस्था को और मजबूत करते हुए सभी प्रकार के पासों को एचआरएमएस प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया गया है।

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दिव्यांग कर्मचारी और पेंशनर भी होंगे लाभान्वित

नई व्यवस्था में दिव्यांग रेलकर्मियों और पेंशनरों को भी विशेष लाभ मिलेगा। उनके आवेदन अब सीधे एचआरएमएस पोर्टल पर दर्ज होंगे और वहीं से पास तैयार होकर जारी किया जाएगा।

इससे अलग-अलग कार्यालयों में आवेदन भेजने या दस्तावेजों की लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से—

  • पास जारी करने में लगने वाला समय घटेगा।
  • रिकॉर्ड पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
  • गड़बड़ी और विवाद की संभावनाएं कम होंगी।
  • कर्मचारियों और पेंशनरों को तेज और आसान सेवा मिलेगी।

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तत्काल प्रभाव से लागू होंगे आदेश

रेलवे बोर्ड ने सभी संबंधित अधिकारियों को नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि यह फैसला स्थापना (कल्याण) निदेशालय से परामर्श और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद लिया गया है।

रेलवे के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अभियान में इस कदम को एक बड़ी पहल माना जा रहा है। इससे लाखों रेलकर्मियों और पेंशनरों के लिए पास प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सरल, तेज और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

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