लैंड फॉर जॉब केस (Land For Job Scam) में सीबीआई कोर्ट (CBI Court) का सख्त आदेश। लालू यादव (LaluYadav) परिवार पर आरोप तय, अदालत बोली—सरकारी पद की आड़ में आपराधिक गिरोह की तरह किया काम।
नई दिल्ली
दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल सीबीआई अदालत ने लैंड फॉर जॉब घोटाले को लेकर ऐसा आदेश दिया है, जिसने लालू प्रसाद यादव और उनके पूरे परिवार को सीधे ट्रायल के कटघरे में खड़ा कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस मामले में सिर्फ संदेह नहीं, बल्कि आपराधिक साजिश के ठोस संकेत मौजूद हैं। इसी आधार पर पूर्व रेल मंत्री लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजप्रताप यादव, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव समेत 41 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए गए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में माना कि रेलवे में चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों के बदले जमीन लेने का यह मामला व्यवस्थित भ्रष्टाचार का उदाहरण है। कोर्ट की टिप्पणी बेहद सख्त रही—लालू यादव और उनके परिवार ने सरकारी पद से अलग होकर एक ऐसे नेटवर्क की तरह काम किया, जिसकी कार्यप्रणाली आपराधिक गिरोह से मेल खाती है।
विशेष सीबीआई अदालत ने कहा कि आरोपों की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने लालू यादव और राबड़ी देवी समेत 41 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि इस स्तर पर आरोपियों को राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों की ओर से दायर की गई बरी करने की अर्जियां स्वीकार योग्य नहीं हैं। चार्जशीट और रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों से यह संकेत मिलता है कि सरकारी संवैधानिक अधिकारों और विवेक का दुरुपयोग किया गया और उसे निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया।
हालांकि अदालत ने 52 आरोपियों को इस मामले से बरी भी किया है। कोर्ट के मुताबिक इन लोगों के खिलाफ आरोप तय करने लायक ठोस सबूत सामने नहीं आए। अब अगली प्रक्रिया में सीबीआई आरोपितों के खिलाफ गवाहों की सूची और दस्तावेजी साक्ष्य पेश करेगी। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित की गई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी केवल उन्हीं लोगों या उनके रिश्तेदारों को मिली, जिन्होंने अपनी जमीन बेहद कम कीमत पर या गिफ्ट के रूप में लालू यादव के परिवार या उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम ट्रांसफर की।
सीबीआई और ईडी का दावा है कि पटना और आसपास की बहुमूल्य जमीनें बाजार मूल्य के एक-चौथाई या एक-पांचवें हिस्से में हासिल की गईं। करीब एक लाख वर्गफुट जमीन मात्र 26 लाख रुपये में ली गई, जबकि उसकी वास्तविक कीमत 4.39 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। अधिकांश जमीनें सीधे या परोक्ष रूप से राबड़ी देवी से जुड़ी पाई गईं, जिन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में अपराध से अर्जित संपत्ति माना गया है।
चार्जशीट में यह भी सामने आया है कि AK Infosystems नामक कंपनी की शेयरहोल्डिंग, जिसके पास कीमती जमीन थी, बाद में बेहद कम कीमत पर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नाम ट्रांसफर की गई, ताकि वास्तविक स्वामित्व छुपाया जा सके।
आरोप तय होने के बाद राष्ट्रीय जनता दल ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।
नई हवा की खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
पेपर से पहले हो गया था सौदा! | STF के खुलासे के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द
राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। हालांकि कोर्ट के आदेश ने साफ कर दिया है कि मामला अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे निकलकर पूरे ट्रायल की ओर बढ़ चुका है।
‘नई हवा’ की खबरों को Subscribe करने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।
