बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल के ICU में तड़के आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। जहरीले धुएं की चपेट में आने से 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा मरीजों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। अपुष्ट खबरों में मरने वालों की संख्या दस बताई जा रही है।
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मुजफ्फरपुर
दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड की चीखें अभी थमी भी नहीं थीं कि गुरुवार तड़के बिहार के मुजफ्फरपुर से एक और दिल दहला देने वाली खबर आ गई। रात के सन्नाटे में अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर बने ICU में अचानक आग भड़की और देखते ही देखते पूरा फ्लोर जहरीले काले धुएं से भर गया। जिन मरीजों को जिंदगी बचाने के लिए ICU में रखा गया था, वे कुछ ही मिनटों में मौत और जिंदगी के बीच फंस गए। हादसे के बाद प्रशासनिक जांच में अस्पताल की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसमें आईसीयू की 13 बेड क्षमता के बावजूद 15 मरीजों को भर्ती किए जाने की पुष्टि हुई है।
ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में सुबह करीब 3 बजे मची इस अफरा-तफरी ने पूरे इलाके को दहला दिया। अस्पताल के गलियारों में धुआं भर गया, मरीज चीखने लगे, परिजन बदहवास होकर इधर-उधर दौड़ने लगे। कई मरीज ऑक्सीजन के लिए तड़पते रहे, जबकि दम घुटने से कुछ लोगों की सांसें हमेशा के लिए थम गईं।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आग ICU वार्ड में लगी और तेजी से पूरे हिस्से में फैल गई। कुछ ही देर में अस्पताल का बड़ा हिस्सा धुएं की गिरफ्त में आ गया। हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अपुष्ट रिपोर्टों में मृतकों की संख्या दस से अधिक बताई जा रही है। 20 से ज्यादा मरीज घायल हुए हैं और कई की हालत गंभीर बनी हुई है।
फायर ऑफिसर आर.एन. पांडे के मुताबिक सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक ICU पूरी तरह काले धुएं से भर चुका था। हालात इतने खराब थे कि बचावकर्मियों को खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर वेंटिलेशन बनाना पड़ा।
ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे मरीजों को खिड़कियों के रास्ते बाहर निकाला गया। कई गंभीर मरीजों को तत्काल दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। राहत की बात यह रही कि दमकलकर्मियों की तेजी से दर्जनों लोगों की जान बचा ली गई।
कर्मचारी नहीं मिले, बढ़े सवाल
राहत और बचाव अभियान के दौरान एक चौंकाने वाली बात भी सामने आई। अधिकारियों के अनुसार जब रेस्क्यू टीम अस्पताल पहुंची, तब वहां अधिकांश कर्मचारी मौजूद नहीं थे। इससे अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच शुरू
प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक कारण की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। सिविल सर्जन और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर हालात की निगरानी कर रहे हैं।
इन लोगों की चली गई जान
इस हृदय विदारक हादसे में जिन लोगों की पहचान हुई है, उनमें मीनापुर के गौरिग्मा गांव निवासी 76 वर्षीय कृष्णनंदन प्रसाद सिंह, कथैया के दिस्टोलिया गांव निवासी 62 वर्षीय गीता देवी, औराई के रतनपुर गांव निवासी एवं वर्तमान में अहियापुर के नेवालाल चौक में रहने वाले 30 वर्षीय शशांक, शिवहर जिले के विशम्भरपुर निवासी 57 वर्षीय उदय कुमार शामिल हैं। एक अन्य मृतक की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
4 लाख की सहायता का ऐलान
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को तत्काल 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने के निर्देश जारी कर दिए हैं। वहीं अस्पताल में लगी आग ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मरीजों की सुरक्षा के नाम पर अस्पतालों में किए जा रहे इंतजाम कितने भरोसेमंद हैं।
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