उदयपुर
राजस्थान के विश्वविद्यालयों में इन दिनों इतिहास की गूंज फिर से सुनाई दे रही है — और वजह है औरंगजेब।
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रोफेसर सुनीता मिश्रा का पुराना बयान, जिसमें उन्होंने मुगल शासक को “कुशल प्रशासक” बताया था, रविवार को एक बार फिर राजनीतिक और अकादमिक गलियारों में गूंज गया।
दरअसल, राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने उस बयान का परोक्ष ज़िक्र करते हुए मंच से ही तल्ख़ सवाल दाग दिया —
“औरंगजेब कैसे कुशल प्रशासक हो सकता है? जिसने छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी के टुकड़े कर दिए, जिसने देशभर में मंदिरों को तोड़ा, वो प्रशासन का आदर्श कैसे बन सकता है?”
राज्यपाल की यह टिप्पणी सुनते ही सभागार में एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। कुछ चेहरे मुस्कुरा दिए, कुछ ठिठक गए। माहौल साफ था — राजभवन अब चुप नहीं रहेगा।
कार्यक्रम के दौरान बागडे ने आगे कहा कि “किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को बोलते समय संयम और विवेक का परिचय देना चाहिए, क्योंकि समाज उनके शब्दों से दिशा पाता है।”
राज्यपाल का यह बयान सीधा किसी नाम के बिना आया, लेकिन निशाना सबको साफ समझ आ गया —
वो कुलगुरु सुनीता मिश्रा पर था, जिन्होंने पिछले महीने औरंगजेब को “अच्छा प्रशासक” बताया था।
बयान के बाद प्रदेशभर में विरोध हुआ, विश्वविद्यालय में विरोध-पत्र सौंपे गए, और मामला इतना बढ़ा कि कुलगुरु को एक माह की छुट्टी पर भेज दिया गया।
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, उनके कार्यकाल में कई प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आई थीं, जिनकी जांच फिलहाल संभागीय आयुक्त स्तर पर जारी है।
राज्यपाल की ताज़ा टिप्पणी के बाद यह विवाद एक बार फिर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में गर्म हो गया है।
कई शिक्षाविद इसे “इतिहास बनाम विवेक” की बहस बता रहे हैं, तो कुछ इसे विश्वविद्यालयों में बढ़ती वैचारिक लड़ाई का अगला अध्याय मान रहे हैं।
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