जयपुर में TPCI और RCCI की बैठक में राजस्थान के निर्यातकों की समस्याओं, सरकारी योजनाओं, FTAs, नए बाजारों और कार्यशील पूंजी पर चर्चा हुई। सेक्टर-वाइज जागरूकता कार्यशाला आयोजित होगी।
जयपुर। राजस्थान के रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, टेक्सटाइल से लेकर मार्बल-स्टोन और कृषि-खाद्य प्रसंस्करण तक कई क्षेत्रों में निर्यात की संभावनाएं हैं, लेकिन योजनाओं की जानकारी, कार्यशील पूंजी, लॉजिस्टिक्स, प्रमाणन और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां अब भी निर्यातकों के सामने बनी हुई हैं। इन मुद्दों को लेकर Trade Promotion Council of India (TPCI) और राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (RCCI) के बीच बुधवार को जयपुर में विस्तृत चर्चा हुई।
TPCI के उप महानिदेशक संदीप दास ने राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का दौरा किया और चैम्बर के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ उद्योग एवं निर्यात, विशेष रूप से हस्तशिल्प क्षेत्र, से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में निर्यातकों की व्यावहारिक समस्याओं, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उपलब्ध नए अवसरों, केंद्र सरकार की निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं और विभिन्न देशों के साथ हुए Free Trade Agreements (FTAs) का प्रभावी लाभ उठाने पर चर्चा हुई।
योजनाएं हैं, लेकिन जानकारी की कमी बड़ी चुनौती
राजस्थान चैम्बर के अध्यक्ष डॉ. के. एल. जैन ने कहा कि केंद्र सरकार ने निर्यातकों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं, सहायता और सब्सिडी का प्रावधान किया है। भारत के कई देशों के साथ हुए Free Trade Agreements से भी भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजारों में प्रवेश के अवसर बने हैं।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं और व्यापार समझौतों की जानकारी अभी भी बड़ी संख्या में उद्यमियों एवं निर्यातकों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाई है। इसी को देखते हुए RCCI, TPCI के सहयोग से सेक्टर-वाइज जागरूकता कार्यशाला आयोजित करेगा। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के निर्यातकों को सरकारी योजनाओं, निर्यात प्रोत्साहन, सब्सिडी, FTAs, संभावित बाजारों और निर्यात प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी विशेषज्ञों के माध्यम से दी जाएगी।
MSME और छोटे निर्यातकों की समस्याओं पर भी फोकस
TPCI के उप महानिदेशक संदीप दास ने कहा कि राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं। TPCI का उद्देश्य उद्योग एवं व्यापार संगठनों के साथ मिलकर इन संभावनाओं को वास्तविक निर्यात अवसरों में बदलना है।
उन्होंने कहा कि निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं, अंतरराष्ट्रीय बाजारों और FTAs के बावजूद कई MSMEs और छोटे निर्यातकों को इनकी पर्याप्त जानकारी नहीं है। TPCI, RCCI के साथ मिलकर व्यावहारिक और सेक्टर-वाइज जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए उद्यमियों को बाजार की संभावनाओं, निर्यात प्रक्रियाओं, सरकारी सहायता, FTA के लाभ और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े आवश्यक पहलुओं की जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत की वास्तविक समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय करना भी TPCI की प्राथमिकताओं में शामिल है।
कार्यशील पूंजी से लेकर लॉजिस्टिक्स तक उठे सवाल
चैम्बर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव भंसाली ने निर्यात क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और निर्यातकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर बात रखी। उन्होंने कहा कि निर्यातकों को वित्तीय संसाधन, कार्यशील पूंजी, भुगतान, लॉजिस्टिक्स, अनुपालन, प्रमाणन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि पर्याप्त वित्तीय सहायता और कार्यशील पूंजी निर्यातकों की प्रमुख चिंताओं में शामिल है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जानकारी, नए खरीदारों तक पहुंच, गुणवत्ता मानक, दस्तावेजीकरण, लॉजिस्टिक्स और अलग-अलग देशों की नियामकीय आवश्यकताओं की जानकारी भी निर्यात कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है।
इन क्षेत्रों में निर्यात की संभावनाएं
RCCI की ओर से बताया गया कि राजस्थान के रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, खनिज, मार्बल एवं स्टोन, चमड़ा सहित कई क्षेत्रों में निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं। सेक्टर-वाइज प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए इन क्षेत्रों से जुड़े उद्यमियों को उपलब्ध अवसरों का बेहतर लाभ उठाने में मदद मिल सकती है।
बैठक के दौरान RCCI के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़ी निर्यात संबंधी समस्याएं और सुझाव भी रखे। TPCI के प्रतिनिधियों ने उद्योग जगत की ओर से उठाए गए मुद्दों पर आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
ये पदाधिकारी और सदस्य रहे मौजूद
कार्यक्रम में चैम्बर के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. आर. एस. जैमिनी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री राजीव भंसाली, डॉ. अरुण अग्रवाल, मानद महासचिव आनंद महरवाल, संयुक्त सचिव बादशाह मियाँ, इन्दर सिंह कुदरत, चैम्बर के सचिव दिनेश कुमार कानूनगो, अतिरिक्त सचिव कन्हैया लाल जांगिड, संयुक्त सचिव अमित पारीक, उप सचिव त्रिनेत्र रोलीवाल, कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती शालिनी अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में उद्योगपति, व्यापारी, आयातक-निर्यातक और चैम्बर सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में चैम्बर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. अरुण अग्रवाल ने TPCI के प्रतिनिधियों और उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह का संस्थागत सहयोग राजस्थान के उद्योग और निर्यात क्षेत्र को नई दिशा देने में उपयोगी साबित होगा।
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