राजस्थान एटीएस ने जयपुर से जैश-ए-मोहम्मद के लिए कथित रूप से काम कर रही महिला स्लीपर सेल बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा को गिरफ्तार किया है। जांच में उसके मोबाइल से आतंकी नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने का दावा किया गया है।
जयपुर। राजस्थान एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर से जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के लिए कथित तौर पर काम कर रही एक महिला स्लीपर सेल को गिरफ्तार किया है। मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) से मिली सूचना के आधार पर पकड़ी गई आरोपी की पहचान राजस्थान के सवाई माधोपुर की रहने वाली बबीता धाकड़, उर्फ ‘खदीजा’, के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह लंबे समय से देश विरोधी नेटवर्क के संपर्क में थी और सीमा पार बैठे पाकिस्तानी हैंडलर्स के निर्देशों पर काम कर रही थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार बबीता सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से लगातार संपर्क में थी। बताया जा रहा है कि इंटरनेट पर संदिग्ध कट्टरपंथी समूहों के संपर्क में आने के बाद उसका कथित तौर पर ब्रेनवॉश किया गया। इसके बाद उसने ऑनलाइन कलमा पढ़कर अपना नाम बदलकर ‘खदीजा’ रख लिया और कथित रूप से जैश-ए-मोहम्मद के स्लीपर सेल मॉड्यूल का हिस्सा बन गई।
जांच के दौरान एटीएस ने आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की तकनीकी फॉरेंसिक जांच शुरू की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मोबाइल कॉन्टैक्ट्स और चैट हिस्ट्री में भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी नेटवर्क से जुड़े कई संदिग्ध संपर्क मिले हैं। इनमें कारी जरार के नेटवर्क से जुड़े नंबर भी बताए जा रहे हैं, जिसे वर्ष 2016 में नगरोटा स्थित भारतीय सेना के कैंप पर हुए आत्मघाती हमले का मुख्य आरोपी माना जाता है। इसके अलावा मसूद अजहर के साले युसूफ अजहर उर्फ गोरी के नेटवर्क से जुड़े नंबर भी मिलने की बात सामने आई है। युसूफ अजहर वर्ष 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 अपहरण मामले का प्रमुख आरोपी रहा है।
जांच एजेंसियों का दावा है कि पूछताछ में जैश-ए-मोहम्मद की एक नई रणनीति का भी संकेत मिला है। शुरुआती जानकारी के अनुसार संगठन ने कथित तौर पर महिलाओं को ऑनलाइन कट्टरपंथ की ओर आकर्षित कर उन्हें स्लीपर सेल के रूप में इस्तेमाल करने के लिए ‘जमात-उल-मुमिनात’ नाम से एक महिला विंग सक्रिय की है। एजेंसियों का मानना है कि बबीता इसी नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुकी थी।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी भारत से निकलकर पाकिस्तान पहुंचने की तैयारी में थी और उसके लिए कथित तौर पर पूरा रूट मैप तैयार किया गया था। फिलहाल मिलिट्री इंटेलिजेंस और राजस्थान एटीएस की संयुक्त टीमें उसे सुरक्षित स्थान पर रखकर गहन पूछताछ कर रही हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का फोकस अब इस बात पर है कि आरोपी ने जयपुर ग्रामीण, सवाई माधोपुर या सेना के अन्य ठिकानों से जुड़ी कितनी संवेदनशील सूचनाएं जुटाकर सीमा पार भेजीं। साथ ही राजस्थान पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि उसे प्रदेश के भीतर इंटरनेट, फर्जी सिम कार्ड, वित्तीय सहायता या अन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट किसने उपलब्ध कराया। आशंका है कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ और स्थानीय लोगों की तलाश में एटीएस की टीमें अलग-अलग जिलों में कार्रवाई कर रही हैं।
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