E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर केंद्र सरकार ने बड़ा खुलासा किया है। चींटियों के आकर्षण, बीमा रद्द होने और गन्ने के रस से पेट्रोल बनाने जैसे दावों को वैज्ञानिक आधार पर खारिज किया गया।
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर फैलाए जा रहे दावों पर आखिरकार केंद्र सरकार को खुलकर सामने आना पड़ा है। कहीं कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों में चींटियां लग रही हैं, कहीं दावा किया जा रहा है कि इससे वाहन बीमा अमान्य हो सकता है, तो कहीं गन्ने के रस को सीधे पेट्रोल में मिलाकर वीडियो बनाकर लोगों को डराया जा रहा है। अब पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इन सभी दावों को भ्रामक, निराधार और वैज्ञानिक तथ्यों से परे बताया है।
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि दो दशक से अधिक समय से चल रही एक वैज्ञानिक और चरणबद्ध प्रक्रिया का हिस्सा है। वर्ष 2003 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश की कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और प्रदूषण घटाना रहा है। इसी योजना के तहत अब E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लागू किया गया है।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक वाहन के फ्यूल टैंक के आसपास बड़ी संख्या में चींटियां दिखाई गईं और दावा किया गया कि E20 पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल चींटियों को आकर्षित करता है। इस पर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने स्पष्ट किया कि ईंधन में इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल अत्याधुनिक फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन प्रक्रियाओं से तैयार किया जाता है, जिसमें शर्करा पूरी तरह समाप्त हो जाती है। इतना ही नहीं, इसमें ऐसे डिनेचुरेंट्स भी मिलाए जाते हैं जो कीटों को दूर रखते हैं। कंपनी के अनुसार E20 ईंधन और चींटियों के आकर्षण के बीच किसी भी प्रकार का वैज्ञानिक संबंध साबित नहीं हुआ है।
मंत्रालय ने उन वीडियो पर भी सवाल उठाए हैं, जिनमें गन्ने के रस को सीधे पेट्रोल में मिलाकर एथेनॉल ब्लेंडिंग का उदाहरण बताया जा रहा है। सरकार के मुताबिक यह लोगों को भ्रमित करने का प्रयास है। एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया जटिल औद्योगिक मानकों से गुजरती है और अंतिम उत्पाद के गुण गन्ने के रस या अन्य कच्चे माल से पूरी तरह अलग होते हैं।
वाहन बीमा को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय का कहना है कि E20 ईंधन के उपयोग से बीमा की वैधता प्रभावित होने का दावा कई बार जांचा गया और गलत पाया गया। ऑटोमोबाइल कंपनियों, ईंधन परीक्षण एजेंसियों और अन्य तकनीकी संस्थाओं से लगातार परामर्श के बाद ही E20 को लागू किया गया है।
सरकार के अनुसार एथेनॉल मिश्रण आज दुनिया के कई देशों में सफलतापूर्वक अपनाया जा चुका है। ब्राजील जैसे देशों में E27 तक का मिश्रण सामान्य रूप से इस्तेमाल हो रहा है, जबकि अमेरिका और जापान भी लंबे समय से इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
केंद्र सरकार का दावा है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की बदौलत भारत अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचा चुका है। इसके साथ ही गन्ना, मक्का, टूटे चावल और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों को भी अतिरिक्त आय का लाभ मिला है।
सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि सोशल मीडिया पर फैल रही सनसनी और अफवाहों के बजाय लोगों को वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करना चाहिए। मंत्रालय का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की हर चरण पर निगरानी की जा रही है और इसे उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित तथा पारदर्शी तरीके से लागू किया जा रहा है।
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