होर्मुज बंद, तो अर्जेंटीना बना सहारा | जंग के बीच भारत को दूर-दराज से मिल रही एलपीजी की नई सप्लाई

होर्मुज (Hormuz) जलडमरूमध्य संकट के बीच अर्जेंटीना भारत को एलपीजी सप्लाई बढ़ाने के लिए आगे आया है। 2026 के पहले तीन महीनों में भारत को 50 हजार टन एलपीजी भेजी गई, ऊर्जा सहयोग के नए दौर के संकेत।

नई दिल्ली 

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति तक पहुंचने लगे हैं। तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई के अहम रास्तों में से एक Strait of Hormuz पर संकट गहराने से भारत के सामने एलपीजी आपूर्ति की चुनौती खड़ी हो गई है। इसी बीच दक्षिण अमेरिका से एक नई मदद सामने आई है—Argentina ने भारत को एलपीजी सप्लाई बढ़ाने की पेशकश की है।

दरअसल भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है और अनुमान है कि करीब 60 प्रतिशत आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। क्षेत्र में युद्ध के कारण जब इस मार्ग पर असर पड़ा और Iran ने रास्ता बंद किया, तो ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ गई। ऐसे समय में अर्जेंटीना से एलपीजी की खेप भारत के लिए राहत का संकेत बनकर आई है।

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तीन महीने में दोगुना से ज्यादा आयात

आर्थिक अख़बार The Economic Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के पहले तीन महीनों में अर्जेंटीना ने भारत को करीब 50 हजार टन एलपीजी भेजी। तुलना करें तो पूरे 2025 में भारत ने अर्जेंटीना से केवल 22 हजार टन एलपीजी आयात की थी। यानी महज तीन महीनों में ही आयात दो गुने से ज्यादा हो गया।

रिपोर्ट के अनुसार 39 हजार टन एलपीजी ईरान-संकट शुरू होने से पहले ही Bahía Blanca Port से भारत पहुंच चुकी थी, जबकि 5 मार्च को 11 हजार टन एलपीजी की एक और खेप भारत के लिए रवाना की गई। दिलचस्प बात यह है कि 2024 से पहले अर्जेंटीना भारत को एलपीजी सप्लाई ही नहीं करता था।

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अर्जेंटीना के पास गैस की कमी नहीं

भारत में अर्जेंटीना के राजदूत Mariano Agustín Caucino ने संकेत दिया है कि यह सहयोग आगे और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि अर्जेंटीना के पास गैस के बड़े भंडार हैं और उनकी राष्ट्रीय तेल-गैस कंपनियां भारत के ऊर्जा क्षेत्र के साथ साझेदारी बढ़ाने में रुचि रखती हैं।

उन्होंने बताया कि अर्जेंटीना की ऊर्जा कंपनियों के प्रतिनिधि पिछले साल भारत आकर ऊर्जा मंत्री Hardeep Singh Puri सहित कई भारतीय कंपनियों से बातचीत कर चुके हैं। उनके मुताबिक यह सहयोग अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन मौजूदा हालात दोनों देशों को ऊर्जा क्षेत्र में और करीब ला सकते हैं।

भारत की ऊर्जा रणनीति में नया अध्याय

राजदूत ने यह भी कहा कि भारत पिछले कुछ वर्षों से ऊर्जा स्रोतों में विविधता (Diversification) की रणनीति पर काम कर रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी संसद में संकेत दिया था कि भारत 40 से अधिक देशों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में अर्जेंटीना भी इस सूची में एक अहम साझेदार बन सकता है।

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व्यापार में पहले से मजबूत रिश्ता

भारत पहले ही अर्जेंटीना का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। खाद्य तेल—खासकर सोयाबीन तेल—के बड़े सप्लायर के रूप में अर्जेंटीना की भारत में मजबूत मौजूदगी है। इसके अलावा सूरजमुखी तेल, अनाज, चमड़ा, रसायन और दालों का भी आयात होता है। अब हाइड्रोकार्बन और खनिज क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की चर्चा तेज हो गई है।

दूरी बनी सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि इस संभावित ऊर्जा साझेदारी के रास्ते में एक बड़ी चुनौती भी है—दूरी। दक्षिण अटलांटिक में स्थित अर्जेंटीना से भारत तक शिपिंग रूट दुनिया के सबसे लंबे मार्गों में गिना जाता है।

Bahía Blanca Port से गुजरात के Dahej Port तक की दूरी करीब 19–20 हजार किलोमीटर पड़ती है। इतनी लंबी दूरी के कारण शिपिंग लागत बढ़ जाती है और सप्लाई में समय भी ज्यादा लगता है। मौसम और समुद्री हालात भी इसमें बाधा बन सकते हैं।

फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि मध्य पूर्व संकट के दौर में ऊर्जा स्रोतों का विस्तार भारत के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी है, जबकि अर्जेंटीना के लिए यह निर्यात के नए बाजार खोलने का मौका है। अगर यह साझेदारी मजबूत होती है, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्जेंटीना की आर्थिक महत्वाकांक्षा—दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है।

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