गुरुग्राम नगर निगम ने AI से फर्जी फोटो अपलोड करने, GPS स्पूफिंग से नकली हाजिरी लगाने और प्रॉपर्टी टैक्स मामलों में अनियमितताओं के आरोप सिद्ध होने पर चार कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया।
गुरुग्राम। तकनीक का इस्तेमाल काम आसान बनाने के लिए होता है, लेकिन गुरुग्राम नगर निगम के चार कर्मचारियों ने उसी तकनीक का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जीवाड़ा करने के लिए किया। किसी ने AI से तस्वीरें एडिट कर शिकायतें निपटाने का झूठा दावा किया, तो किसी ने GPS स्पूफिंग ऐप के जरिए बिना ड्यूटी पर पहुंचे अपनी हाजिरी लगा दी। विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद नगर निगम आयुक्त ने चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया।
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नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया की ओर से जारी आदेशों के मुताबिक, विभागीय जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद संबंधित कर्मचारियों पर सेवा नियमों के उल्लंघन, सरकारी कार्य में लापरवाही, फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने, पद के दुरुपयोग और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप सिद्ध पाए गए।
प्रॉपर्टी टैक्स मामलों में लगाई बेवजह आपत्तियां
जांच में सामने आया कि कंप्यूटर ऑपरेटर नीरज वशिष्ठ और अंकुर अरोड़ा प्रॉपर्टी आईडी और प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े मामलों में तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) से हटकर अनावश्यक आपत्तियां दर्ज कर रहे थे। इसका नतीजा यह हुआ कि वैध आवेदनों के निस्तारण में देरी हुई और आम लोगों को बेवजह परेशानी उठानी पड़ी।
कारण बताओ नोटिस और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद भी दोनों कर्मचारी अपने पक्ष में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
AI से बनाई ‘काम पूरा’ होने की तस्वीरें
एचकेआरएनएल के तहत नियुक्त सहायक सफाई निरीक्षक वसीम के खिलाफ जांच में एक अलग तरह का फर्जीवाड़ा सामने आया। आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक शिकायतों के समाधान का दावा करने के लिए AI आधारित तकनीक से तस्वीरों में बदलाव किया और उन्हें शिकायत पोर्टल पर अपलोड कर दिया। इससे बिना वास्तविक समाधान किए ही शिकायतों को निस्तारित दिखाया गया।
जांच और व्यक्तिगत सुनवाई में आरोपों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर इसे धोखाधड़ी और सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ मानते हुए उनकी सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं।
ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, फिर भी हाजिरी लगा दी
एक अन्य मामले में सहायक सफाई निरीक्षक सोनू पर आरोप सिद्ध हुआ कि वह ड्यूटी स्थल पर मौजूद नहीं थे, लेकिन GPS स्पूफिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर नगर निगम के उपस्थिति पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कर दी। विभागीय जांच में यह आरोप सही पाया गया, जिसके बाद इसे गंभीर अनुशासनहीनता और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर मानते हुए उनकी भी सेवा समाप्त कर दी गई।
नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने साफ कहा कि नागरिकों को पारदर्शी, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देना निगम की प्राथमिकता है। नियमों का उल्लंघन, फर्जीवाड़ा, कर्तव्य में लापरवाही या पद के दुरुपयोग के मामलों में भविष्य में भी दोषियों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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