राजकीय कला कन्या महाविद्यालय कोटा में छमाही शोध-प्रगति प्रस्तुतीकरण हुआ। करीब 20 शोधार्थियों ने शोध कार्य की प्रगति साझा की और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।
कोटा। शोध सिर्फ किसी विषय पर जानकारी जुटाने का नाम नहीं, बल्कि सवालों को गहराई से समझकर नए निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया है। इसी सोच के साथ राजकीय कला कन्या महाविद्यालय, कोटा में छमाही शोध-प्रगति प्रस्तुतीकरण आयोजित किया गया। इसमें केंद्र पर कार्यरत करीब 20 शोधार्थियों ने अपने शोध कार्य की अब तक की प्रगति उपस्थित विद्वानों और शोधार्थियों के सामने साझा की।
महाविद्यालय के शोध एवं प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में शोधार्थियों को अपने काम को सामने रखने के साथ उस पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने का अवसर भी मिला।
शोध कार्य को सिर्फ दिखाया नहीं, परखा भी गया
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. नवीन मित्तल, सहायक निदेशक, कोटा परिक्षेत्र एवं अध्यक्ष, डॉ. सीमा चौहान, प्राचार्य, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय, कोटा ने शोधार्थियों की प्रस्तुतियों को देखा और उनके शोध कार्य की सराहना की।
डॉ. नवीन मित्तल ने कहा कि इस तरह का प्रस्तुतीकरण अनुसंधान और गहन चिंतन की नींव मजबूत करने वाली प्रक्रिया है। इससे शोधार्थियों को अपने काम पर विचार करने और ज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
22 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
आयोजन में प्रेरक अतिथि श्रीमती प्रेरणा शर्मा, डॉ. राजेंद्र माहेश्वरी सहित विभिन्न संकाय सदस्यों और करीब 22 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का संचालन शोध एवं विकास प्रकोष्ठ की सदस्य डॉ. पारुल सिंह ने किया, जबकि डॉ. प्रियंका वर्मा ने तकनीकी सहयोग देते हुए प्रस्तुतियों को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में भूमिका निभाई।
प्रकोष्ठ संयोजक डॉ. त्रिभु नाथ दुबे ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा बताने के साथ राजस्थान सरकार की शोध वृत्ति तथा केंद्र सरकार की विभिन्न शोध-छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी।
शोधार्थियों को योजनाओं की भी मिली जानकारी
कार्यक्रम में केवल शोध की प्रगति तक बात सीमित नहीं रही। शोधार्थियों को उपलब्ध शोधवृत्ति और छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी भी दी गई, ताकि वे अपने शोध कार्य के लिए उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकें।
समापन अवसर पर डॉ. पारुल सिंह ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया।
प्रस्तुतीकरण में शोध पर्यवेक्षक डॉ. बिंदु चतुर्वेदी, डॉ. हिमानी सिंह, डॉ. उमा बड़ोलिया, डॉ. श्रुति अग्रवाल तथा वरिष्ठ संकाय सदस्य श्रीमती मीरा गुप्ता, डॉ. श्रद्धा सोरल, डॉ. राजमल मालव और सुश्री हर्षा जैन की उपस्थिति और मार्गदर्शन ने शोधार्थियों का उत्साह बढ़ाया।
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