राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दीक्षांत समारोह से पहले रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय ने बड़ा फैसला लिया है। अब डिग्री और मार्कशीट में ‘India’ नहीं बल्कि ‘भारत’ लिखा जाएगा। जानिए पूरा मामला।
जबलपुर। क्या आने वाले समय में विश्वविद्यालयों की डिग्रियों से ‘India’ शब्द पूरी तरह गायब हो जाएगा? मध्य प्रदेश से इसकी शुरुआत होती दिख रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 21 जून को प्रस्तावित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने एक बार फिर ‘भारत बनाम इंडिया’ की बहस को हवा दे दी है।
अब रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की ओर से जारी होने वाली सभी डिग्रियों और अंकतालिकाओं में अंग्रेजी और हिंदी—दोनों भाषाओं में ‘भारत’ शब्द का ही इस्तेमाल किया जाएगा। यानी आधिकारिक दस्तावेजों में ‘India’ की जगह ‘Bharat’ दर्ज होगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति राजेश कुमार वर्मा का कहना है कि देश का वास्तविक नाम भारत है और इसी सोच के साथ कार्यकारी परिषद ने सभी आधिकारिक दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द अपनाने का प्रस्ताव पारित किया है। उनका कहना है कि जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी ‘भारत’ शब्द के प्रयोग ने इस सोच को और मजबूती दी।
महाकुंभ में मिला सम्मान, अब दूसरे विश्वविद्यालय भी इसी राह पर
विश्वविद्यालय का दावा है कि इस पहल को वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित ज्ञान महाकुंभ के दौरान सम्मान भी मिल चुका है। हालांकि, इस मामले में इंदौर का देवी अहिल्या विश्वविद्यालय खुद को पहला संस्थान बताता है जिसने आधिकारिक दस्तावेजों में ‘India’ की जगह ‘Bharat’ लिखने का निर्णय लिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि उनके बाद अन्य संस्थान भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ तक पहुंचा अभियान
सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने भी अपने दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि देश की पहचान ‘भारत’ ही है और आधिकारिक कामकाज में उसी नाम का उपयोग होना चाहिए।
17 विश्वविद्यालयों ने अपनाया रास्ता
रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास लंबे समय से ‘India’ की जगह ‘भारत’ शब्द के उपयोग को बढ़ावा देने का अभियान चला रहा है। संगठन से जुड़े एमएल गुप्ता का दावा है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के 17 विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान आधिकारिक कामकाज में केवल ‘भारत’ शब्द अपनाने का प्रस्ताव पारित कर चुके हैं।
2023 में भी छिड़ी थी ‘भारत’ बनाम ‘इंडिया’ की बहस
देश के नाम को लेकर विवाद नया नहीं है। वर्ष 2023 में जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखी नेमप्लेट पर ‘भारत’ लिखा जाने के बाद भी यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस बन गया था। उस समय कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ से जोड़ते हुए सरकार पर ध्यान भटकाने की राजनीति करने का आरोप लगाया था। राहुल गांधी ने कहा था कि संविधान में लिखा “India, that is Bharat” उनकी दृष्टि में स्वीकार्य है, लेकिन सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक रूप दे रही है।
अब राष्ट्रपति की मौजूदगी में होने वाले दीक्षांत समारोह से पहले रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का यह फैसला एक बार फिर इस बहस को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना सकता है।
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