धौलपुर नगर परिषद के कार्यवाहक आयुक्त गुमान सिंह सैनी को कथित रिश्वत और कमीशन लेने के वायरल वीडियो के बाद निलंबित कर दिया गया है। सैनी ने वीडियो को फर्जी बताते हुए जांच और एफआईआर की मांग की है।
धौलपुर। एक वायरल वीडियो ने धौलपुर नगर परिषद में ऐसा भूचाल ला दिया कि कार्यवाहक आयुक्त और अधिशासी अभियंता गुमान सिंह सैनी की कुर्सी चंद घंटों में चली गई। सोशल मीडिया पर सामने आए कथित वीडियो में सैनी एक व्यक्ति से कमीशन की रकम पर बातचीत करते और फिर नकदी गिनते नजर आए। वीडियो वायरल होते ही मामला प्रशासन और सरकार तक पहुंच गया।
राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुमान सिंह सैनी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। विभाग ने राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करते हुए निलंबन आदेश जारी किए। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जयपुर स्थित स्थानीय निकाय निदेशालय रहेगा।
वायरल वीडियो में आरोप है कि नगर परिषद से जुड़े एक मामले में करीब 32 हजार रुपए कमीशन के तौर पर लिए जा रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद जिला कलक्टर श्रीनिधि बी. टी. ने भी तत्काल प्रशासनिक कदम उठाए। उन्होंने गुमान सिंह सैनी से नगर परिषद आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार वापस लेकर मनियां के अधिशासी अधिकारी विष्णु परमार को सौंप दिया और पूरे मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए।
हालांकि, गुमान सिंह सैनी ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वायरल वीडियो फर्जी है और उन्हें बदनाम करने की साजिश के तहत फैलाया गया है। सैनी का दावा है कि संबंधित फर्म भुगतान को लेकर दबाव बना रही थी और मनमानी नहीं होने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई थी। उन्होंने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी की है।
दूसरी ओर जिला प्रशासन का कहना है कि वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। नगर परिषद के कुछ कर्मचारियों ने भी एक फर्म प्रतिनिधि की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग का ज्ञापन सौंपा है, जिसे जांच का हिस्सा बनाया गया है।
नगर परिषद धौलपुर पहले भी रिश्वतखोरी के आरोपों से सुर्खियों में रह चुकी है। गत 11 सितम्बर 2025 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने नगर परिषद के पांच कर्मचारियों को 3.10 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उस कार्रवाई में एक महिला इंजीनियर भी शामिल थी। पूछताछ के बाद तत्कालीन आयुक्त अशोक शर्मा को एसीबी ने छोड़ दिया था, लेकिन उस मामले के बाद से परिषद में स्थायी आयुक्त की नियुक्ति नहीं हो सकी। बाद में यह जिम्मेदारी अतिरिक्त प्रभार के रूप में विभिन्न अधिकारियों के पास रही।
अब नया विवाद सामने आने के बाद धौलपुर नगर परिषद एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जांच के नतीजे क्या निकलते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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