जिला और अधीनस्थ अदालतों के बुनियादी ढांचे की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र 1993-94 से CSS के जरिए कोर्ट रूम, आवास, वकील हॉल, शौचालय और डिजिटल कंप्यूटर कक्ष के लिए मदद दे रहा है।
नई दिल्ली। देश की जिला और अधीनस्थ अदालतों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर केंद्र सरकार ने जिम्मेदारी का ढांचा साफ किया है। अदालतों के लिए भवन, कोर्ट रूम और दूसरी जरूरी सुविधाएं विकसित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। हालांकि, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार करीब तीन दशक से सहायता दे रही है।
केंद्र सरकार ने 1993-94 से जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के बुनियादी ढांचे के लिए केन्द्र प्रायोजित योजना (CSS) लागू कर रखी है। इस योजना में अदालतों की जरूरत से जुड़ी पांच प्रमुख सुविधाओं को शामिल किया गया है।
कोर्ट रूम से डिजिटल कंप्यूटर कक्ष तक पांच सुविधाएं
केंद्र की योजना के तहत जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में इन सुविधाओं के विकास के लिए मदद दी जाती है—
- न्यायालय कक्ष
- न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयां
- अधिवक्ताओं के लिए हॉल
- शौचालय परिसर
- डिजिटल कंप्यूटर कक्ष
यानी योजना का दायरा सिर्फ अदालत के कमरे तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायिक अधिकारियों के आवास, वकीलों के लिए जगह और डिजिटल सुविधाओं तक फैला हुआ है।
कोर्ट रूम का डिजाइन कौन तय करता है?
अदालतों के भवन और कोर्ट रूम से जुड़े कई अहम फैसले उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। कोर्ट रूम के डिजाइन और CSS के तहत वित्त पोषित होने वाली परियोजनाओं को उच्च न्यायालय की भवन बुनियादी ढांचा समिति मंजूरी देती है।
कोर्ट परिसर में महिलाओं के अनुकूल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़े पहलू भी इसी स्तर पर तय किए जाते हैं।
केंद्र ने मानक भी तय कर रखे हैं
हालांकि निर्माण और परियोजनाओं की मंजूरी में राज्यों तथा उच्च न्यायालयों की भूमिका है, लेकिन CSS के दिशा-निर्देशों में कोर्ट रूम के लिए मानदंड और तकनीकी विनिर्देश निर्धारित किए गए हैं।
ये मानक सर्वोच्च न्यायालय की राष्ट्रीय न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (NCMS) समिति की सिफारिशों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) की अपनाई गई कार्यप्रणालियों पर आधारित हैं।
राज्यसभा में सरकार ने दी जानकारी
जिला अदालतों के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं से जुड़े सवाल पर कानून एवं न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में लिखित उत्तर दिया।
सरकार के जवाब से साफ है कि अदालतों के बुनियादी ढांचे की मुख्य जिम्मेदारी राज्यों की है, जबकि केंद्र की योजना उनके संसाधनों को बढ़ाने और जरूरी सुविधाओं के विकास में वित्तीय सहयोग देने का काम करती है।
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