देश के 3688 राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्मारकों में 414 पर अतिक्रमण की सूचना मिली है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि ASI सीमाओं का सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण कर चुका है।
नई दिल्ली। देश की ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर सरकार के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय महत्व के घोषित 3688 प्राचीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों में से 414 पर अतिक्रमण की सूचना मिली है। यानी देश की महत्वपूर्ण धरोहरों की एक बड़ी संख्या अतिक्रमण की चुनौती से जूझ रही है।
केंद्र सरकार ने यह जानकारी राज्यसभा में दी है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखित जवाब में बताया कि सरकार ने इन मामलों का संज्ञान लिया है और जहां भी अतिक्रमण या अनधिकृत गतिविधियां सामने आती हैं, वहां कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।
अतिक्रमण रोकने के लिए पहले जमीन की हद तय करना जरूरी
किसी स्मारक को बचाने में सबसे बड़ी चुनौती उसकी वास्तविक सीमा को लेकर होती है। सरकार के मुताबिक, इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) स्थानीय राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर संयुक्त सर्वेक्षण करता है।
इसका मकसद संरक्षित स्मारक और उसके आसपास की जमीन की सीमा को स्पष्ट करना है, ताकि बाद में अतिक्रमण या अनधिकृत गतिविधियों को लेकर स्थिति अस्पष्ट न रहे।
ASI ने स्मारकों की सीमाएं डिजिटल कर दीं
अब इस पूरी प्रक्रिया को तकनीक से भी जोड़ा गया है। ASI ने संरक्षित स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों की सीमाओं का सर्वेक्षण, भू-संदर्भ निर्धारण और डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है।
इन डिजिटल रिकॉर्ड को भुवन पोर्टल पर अपलोड किया गया है। जहां जरूरत होती है, वहां राज्य सरकारों और राजस्व अधिकारियों के सहयोग से इन आंकड़ों को राज्य के भूमि रिकॉर्ड से भी जोड़ा जा रहा है।
स्मारक बचाने के लिए जमीन का मालिक होना जरूरी नहीं
सरकार ने एक महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति भी स्पष्ट की है। AMASR Act, 1958 के तहत किसी स्मारक के संरक्षण के लिए उस जमीन का अधिग्रहण करना या उस पर ASI का मालिकाना होना अनिवार्य नहीं है।
यानी किसी ऐतिहासिक स्मारक की सुरक्षा केवल जमीन के स्वामित्व पर निर्भर नहीं है। ASI का मुख्य दायित्व कानून और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार राष्ट्रीय महत्व के घोषित स्मारकों का संरक्षण और रखरखाव करना है।
अतिक्रमण मिला तो कार्रवाई का प्रावधान
सरकार के अनुसार संरक्षित स्मारक या स्थल पर अतिक्रमण अथवा कोई अनधिकृत गतिविधि सामने आने पर प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 और उसके तहत बने 1959 के नियमों के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है।
हालांकि सरकार ने राज्यसभा में दिए जवाब में यह भी बताया है कि 414 स्मारकों और स्थलों पर अतिक्रमण की सूचना मिली है और इसका राज्यवार विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।
अब डिजिटल सीमांकन और भूमि रिकॉर्ड के एकीकरण की प्रक्रिया इस बात में अहम हो सकती है कि इन ऐतिहासिक धरोहरों की जमीन पर होने वाली गतिविधियों की पहचान और निगरानी कितनी प्रभावी तरीके से हो पाती है।
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