नई हवा ब्यूरो
राजस्थान के दौसा जिले में एक चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को एक ऐसा फरमान जारी किया है जिससे सभी सकते में हैं। उनके इस फरमान से जो कोरोना पॉजिटिव आए हैं, वे भी सकते में हैं और जो नहीं आए हैं वे भी दहशत में हैं कि वे अब करें तो क्या करें? ये फरमान लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह लिखा है आदेश में
मामला दौसा के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय का है और इस कार्यालय की ओर से जारी इस अजीब फरमान पर 28 अप्रेल की तारीख पड़ी है। और यह फरमान CMHO डॉ. मनीष चौधरी के दस्तखतों से जारी किया गया है। इसमें उन्होंने कोरोना महामारी को देखते हुए मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अपने समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों को आदेशित किया है कि वे सभी नियत ड्यूटी पर उपस्थित रहेंगे और यदि किसी कार्मिक की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आती है और भले ही उसे किसी प्रकार के लक्षण प्रतीत न होते हों तो भी उसे सोशियल डिस्टेंस रखते हुए ड्यूटी पर उपस्थिति देनी होगी। और यदि किसी कार्मिक को लक्षण दिखते हैं तो वह अस्पताल में भर्ती होना सुनिश्चित करें।
CMHO डॉ. मनीष चौधरी ने समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों को इस फरमान में चेतावनी दी है कि यदि इन आदेशों की अवहेलना की तो आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। CMHO के इस फरमान की कॉपी ‘नई हवा’ के पास है। अब इन आदेशों के बाद समस्या ये आ गई है कि कोरोना पॉजिटिव वाले कार्मिक अपना इलाज करवाएं या ड्यूटी पर उपस्थित होकर दूसरों का जीवन खतरे में डालें? और जो पॉजिटिव नहीं आए हैं उनमें यह दहशत है कि कहीं वे पॉजिटिव वाले कार्मिकों के साथ संक्रमित नहीं हो जाएं। फिर एक सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि पॉजिटिव वाले कार्मिक दूसरे मरीजों का इलाज करेंगे कैसे?
तो फिर क्या मुख्यमंत्री गहलोत को भी अपने ऑफिस आ जाना चाहिए?
दौसा CMHO डॉ. मनीष चौधरी के आदेशों के मायने तो यह भी निकलते हैं कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी कोरोना पॉजिटिव होते हुए भी अपने ऑफिस आ जाना चाहिए। क्योंकि भले ही गहलोत कोरोना पॉजिटिव आए हों, पर कोरोना के लक्षण तो उनमें भी नहीं दिखाई दे रहे जैसा कि गहलोत ने अपनी पोस्ट में लिखा था।
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