वटवृक्ष
डॉ. अलका अग्रवाल, सेवानिवृत कालेज प्राचार्य
छांव की तलाश
कब से तलाश रही हूँ छाँव
मिल जाए कोई बरगद
उसकी दूर दूर तक फैली
शीतल छाया में,
कुछ पल सुस्ता ही लूँ।
पर खोज आज तक जारी ही रही।
कोई विशाल वटवृक्ष न मिलना था
ना ही मिला।
शायद यूँ ही चलता रहता यह सिलसिला।
पर अचानक खुल गए मेरे प्रज्ञाचक्षु।
मैंने स्वयं से कहा,
क्यों मारा -मारा फिरता है
तू स्वयं ही विशाल वृक्ष क्यों नहीं बन जाता
जिसकी घनी छाँव में राही सुस्ता सकें
चार पल आराम के बिता सकें।
नई हवा की खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
राजस्थान में पार्षदों की बल्ले-बल्ले, बढ़ गए भत्ते | जानिए सरकार ने कितने बढ़ाए भत्ते
भारतीय रेलवे का बड़ा कदम: अब 12 पहियों वाले छोटे लेकिन ताकतवर इंजन से दौड़ेंगी ट्रेनें
हिमाचल में शिक्षा विभाग हुआ दो हिस्सों में विभाजित, सरकार ने बताए ये फायदे
अब डिग्री के लिए जरूरी होगा IKS, UGC का नया नियम छात्रों के लिए बड़ी शर्त
नई हवा’ की खबरें नियमित और अपने मोबाइल पर डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें
