भरतपुर
भरतपुर की डकैती कोर्ट ने जान से मरने के एक मामले में एक सरकारी शिक्षक को दोषी मानते हुए 7 साल की सजा और 1 हजार रुपए से दण्डित किया है। डकैती कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले पर 11 साल बाद फैसला सुनाया।
जानकारी के अनुसार कुम्हेर थाना इलाके के पिचूमर गांव में साल 2010 में 9 मई की रात घूरन सिंह अपने दो बेटों के साथ घर के बरामदे में सो रहा था। तभी उसे देर रात कुत्तों के भौंकने की आवाज आई। जिस पर घूरन सिंह उठ गया और उसने देखा की गांव के तीन व्यक्ति विजय पाल, साहब सिंह और मेघश्याम उसके घर की तरफ आ रहे हैं। घूरन सिंह ने जब तीनों से वहां आने का कारण पूछा तो विजय पाल और साहब सिंह ने घूरन सिंह के ऊपर हथगोले फेंक दिए और तीनों आरोपी मौके से भाग गए। हथगोलों की आवाज सुन घूरन सिंह और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे जहां उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
घूरन के पर्चा बयान के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। कोर्ट ने साहब सिंह और मेघश्याम को आरोपी मान लिया और विजय पाल को आरोपी नहीं माना जिस पर कोर्ट में विजय पाल को भी आरोपी बनाने की एप्लीकेशन लगाई गई। जिसके बाद विजय पाल को भी कोर्ट ने आरोपी मान लिया। इस बीच साहब सिंह और मेघश्याम की मौत हो गई। 11 साल बाद डकैती कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए विजय पाल को 7 साल की सजा और 1 रुपये का जुर्माना लगाया है।
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