भरतपुर के गोलमोल की बगीची कुंडा पर सवा चार करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी जलकुंभी, दुर्गंध, बंद सोलर लाइटें और अधूरे ट्रैक की समस्या सामने आई है।
भरतपुर। शहरवासियों को हरियाली, स्वच्छ वातावरण और सुकून देने के लिए जिस पार्क को विकसित किया गया, वहां अब बुनियादी सुविधाओं की बदहाली सवाल खड़े कर रही है। हीरादास केंद्रीय बस स्टैंड से गोलपुरा बाईपास की ओर नुमाइश मैदान के पास स्थित गोलमोल की बगीची कुंडा पर करीब सवा चार करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन कुंड के पानी से उठती दुर्गंध, फैलती जलकुंभी, बंद पड़ी सोलर लाइटें और अधूरा भ्रमण पथ इसकी मौजूदा स्थिति की कहानी बयां कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल रखरखाव को लेकर है। निर्माण कार्य करीब एक साल पहले सतीराज कंस्ट्रक्शन, ग्वालियर की ओर से कराया गया था। जानकारी के अनुसार, सरकार और निर्माण कंपनी के बीच हुए एमओयू में पांच साल तक पार्क के रखरखाव की जिम्मेदारी भी कंपनी की बताई गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब रखरखाव की अवधि अभी जारी है, तो पार्क की व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के लिए क्या किया जा रहा है?
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कुंड में जलकुंभी, पानी से उठ रही दुर्गंध
पार्क के कुंड की हालत सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बताई जा रही है। पानी के एरिएशन सिस्टम की व्यवस्था नहीं होने से दुर्गंध की समस्या सामने आ रही है। वहीं, कुंड में जलकुंभी फैलने के बावजूद इसे हटाने के प्रभावी इंतजाम नजर नहीं आने की बात कही जा रही है। सुबह-शाम घूमने आने वाले लोगों के लिए यह स्थिति परेशानी का कारण बन रही है। जिस जगह पर लोग ताजी हवा और सुकून की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां पानी की दुर्गंध और गंदगी पार्क के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े कर रही है।
पौधे लगाए, लेकिन देखभाल कहां?
पार्क के ट्रैक के दोनों ओर लगाए गए पौधों और हेज की नियमित कटिंग व सिंचाई में भी कमी की शिकायत है। कहीं-कहीं छंटाई के बाद पत्तियों को उठाकर बाहर ले जाने के बजाय कुंड में ही डाल दिया गया है। इससे सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के साथ कुंड में गंदगी बढ़ने की आशंका भी है।
ट्रैक के दूसरी ओर करीब ढाई हजार पौधों से विकसित किए गए हरित क्षेत्र की देखभाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पौधे लगाना किसी पार्क को विकसित करने का पहला कदम है, लेकिन उनकी नियमित सिंचाई, छंटाई और संरक्षण के बिना हरित क्षेत्र को बेहतर बनाए रखना मुश्किल है।
गारंटी के बावजूद सोलर लाइटें बंद
पार्क में शाम के समय रोशनी के लिए लगाई गई सोलर लाइटों में से कई लंबे समय से बंद बताई जा रही हैं। बताया गया है कि लाइटें अभी गारंटी अवधि में हैं, इसके बावजूद उन्हें दुरुस्त करने या बदलने की अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इसका असर शाम को पार्क में आने वाले लोगों की सुविधा पर पड़ता है। नियमित साफ-सफाई की कमी भी परेशानी बढ़ा रही है। ऐसे में सवाल केवल लाइटें लगाने का नहीं, बल्कि खराब होने पर उन्हें ठीक कराने और व्यवस्था की निगरानी का भी है।
आधा ट्रैक, अधूरी परिक्रमा
पार्क का भ्रमण पथ भी पूरा नहीं हो सका है। ट्रैक का करीब आधा हिस्सा निर्माण से वंचित होने के कारण लोग पूरे पार्क की परिक्रमा नहीं कर पाते। इससे नियमित मॉर्निंग वॉक और भ्रमण के लिए आने वालों को असुविधा होती है। करोड़ों रुपये की लागत से विकसित पार्क में यदि भ्रमण पथ ही अधूरा रह जाए, तो उसकी उपयोगिता प्रभावित होना स्वाभाविक है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि निर्माण के दौरान तय योजना के मुताबिक सभी काम पूरे किए जाने चाहिए थे।
निगम की निगरानी और संवेदक की जिम्मेदारी पर सवाल
गोलमोल की बगीची कुंडा की मौजूदा स्थिति सार्वजनिक निर्माण कार्यों के रखरखाव और उनकी निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। यदि एमओयू के अनुसार पांच साल तक देखरेख की जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की है, तो नगर निगम को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अनुबंध की शर्तों का पालन हो और कमियों को समय रहते दूर किया जाए।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि कुंड की सफाई कराकर जलकुंभी हटाई जाए, पानी को स्वच्छ रखने के लिए उचित तकनीकी व्यवस्था की जाए, बंद सोलर लाइटें ठीक कराई जाएं और पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित हो। इसके साथ ही अधूरे ट्रैक का निर्माण भी पूरा कराया जाए।
अब सवाल यह है कि सवा चार करोड़ रुपये खर्च कर विकसित किए गए इस पार्क की बदहाली दूर करने के लिए नगर निगम और संबंधित निर्माण कंपनी कब ठोस कदम उठाते हैं। शहरवासियों को केवल विकसित पार्क नहीं, बल्कि साफ-सुथरा और नियमित देखरेख वाला सार्वजनिक स्थल भी मिलना चाहिए।
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