बैंकों में महाघोटाला: नौकरी किसी और की, बैंक में मलाई काट रहा कोई और! CBI के शिकंजे में फंसे ‘डमी’ चेहरे

बैंकिंग परीक्षा फर्जीवाड़े में सीबीआई ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आईबीपीएस की जांच में सामने आया कि मॉर्फ्ड फोटो और आइरिस स्कैन के जरिए 257 डमी उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से 180 लोग बैंकों में नौकरी कर रहे हैं।

मुंबई। सरकारी बैंकों की नौकरी पाने का शॉर्टकट अब बड़े फ्रॉड का काला चिट्ठा बनकर सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मुंबई की विशेष अदालत में जो खुलासा किया है, उसने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और पारदार्शिता पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। परीक्षा किसी और ने दी, आइरिस स्कैन (आंखों की पुतली का मिलान) किसी और का हुआ, और जब ज्वॉइनिंग का वक्त आया तो बैंक की कुर्सी पर कोई और ही जा बैठा। 

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आंखें खुली की खुली रह गईं: ऐसे हुआ खेल

बैंकिंग परीक्षाओं में निष्पक्षता बनाए रखने वाली सर्वोच्च संस्था IBPS ने जब पिछले पांच सालों के डेटा का पोस्टमार्टम किया, तो जो सच सामने आया वह रोंगटे खड़े करने वाला था:

  • फोटो मॉर्फिंग का शातिर जाल: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के वक्त शातिरों ने असली उम्मीदवारों की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ (Morphing) कर अपनी या डमी चेहरों की फोटो फिट कर दी।

  • हर चरण में नया फरेब: लिखित परीक्षा से लेकर इंटरव्यू, बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन और अंत में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन तक—हर जगह असली की जगह शातिर ‘डमी कैंडिडेट्स’ (नकली उम्मीदवार) बनकर पहुंचते रहे।

  • असली उम्मीदवार घर बैठे रहे: जब खेल पूरा हो जाता और हाथ में ज्वॉइनिंग लेटर आ जाता, तो असली कैंडिडेट बैंक की नौकरी ज्वाइन कर लेता था, जिसने कभी परीक्षा का एक पन्ना तक नहीं पलटा था।

257 संदिग्ध बेनकाब, 180 धुरंधर कर रहे थे नौकरी

जब IBPS ने कड़ाई दिखाते हुए देश भर के बैंकों को बायोमेट्रिक्स का दोबारा मिलान (Re-verification) करने का फरमान जारी किया, तो भूचाल आ गया।

  • जांच के दायरे में कुल 257 संदिग्ध चेहरे आए।

  • इनमें से 180 ऐसे शातिर थे जो देश के अलग-अलग सरकारी बैंकों में बाकायदा नौकरी की मलाई काट रहे थे।

  • हैरान करने वाली बात यह है कि कम से कम 54 डमी उम्मीदवार ऐसे निकले जिन्होंने एक-दो नहीं बल्कि कई अलग-अलग अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा पास कराई थी और करीब 172 लोगों को अवैध तरीके से नौकरी की सीढ़ी चढ़ाई थी।

IBPS ने इन सभी धांधलीबाजों को जीवनभर के लिए ब्लैकलिस्ट (Lifetime Ban) कर दिया है।

CBI की दबिश: चार गिरफ्तार, कस्टडी में खुलेगी पोल

इस हाई-प्रोफाइल रैकेट का पर्दाफाश करते हुए CBI ने 8 और 9 अक्टूबर को ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए चार मुख्य आरोपियों को दबोच लिया:

  • विश्व भास्कर: जो संजीव कुमार भारती और संतोष कुमार भारती जैसे अभ्यर्थियों के बदले परीक्षा दे रहा था।

  • अभिषेक कुमार और मनीष कुमार: जो क्रमशः हरिमोहन मीणा और अमित कुमार बनकर फर्जीवाड़ा कर रहे थे।

इन सभी के आइरिस स्कैन (Iris Scan) जांच के दौरान पूरी तरह से मैच हो चुके हैं। इसके अलावा, 2020-21 के दौरान इस गिरोह का मोहरा बने राजीव रंजन को भी 13 अक्टूबर तक के लिए CBI की रिमांड पर भेज दिया गया है।

एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े की जड़ें देश में कहां-कहां तक फैली हैं और इस सिंडिकेट के पीछे कौन-कौन से बड़े चेहरे या अधिकारी शामिल हैं। आने वाले दिनों में कई और बड़ी गिरफ्तारियों की सुई घूम रही है।

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