GenZ आंदोलनों और राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रमों के बीच केरल के त्रिपुनिथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में ABVP ने सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की। लंबे समय से SFI के प्रभाव वाले कॉलेज में बड़ा बदलाव।
तिरुवनंतपुरम। GenZ आंदोलनों और राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रमों के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में तीन बड़े पद जीतने के बाद अब केरल से भी ABVP के लिए बड़ा चुनावी नतीजा सामने आया है। त्रिपुनिथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में ABVP ने सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज कर SFI के 45 साल से चले आ रहे दबदबे को खत्म कर दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक संगठन के उम्मीदवारों ने छात्रसंघ के सभी 12 पदों पर जीत हासिल की है।
यह कॉलेज लंबे समय से SFI के प्रभाव वाले कैंपस के तौर पर जाना जाता रहा है। ऐसे में इस बार ABVP का पूरा पैनल जीतना केरल की कैंपस राजनीति में बड़ा बदलाव है। कुछ रिपोर्टों में SFI के प्रभाव को चार दशक से ज्यादा पुराना बताया गया है।
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DUSU के बाद केरल में भी पूरा पैनल ABVP के नाम
यह नतीजा ऐसे समय आया है जब 2026 के DUSU चुनाव में ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पदों पर जीत दर्ज की है। अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव का पद ABVP के खाते में गया, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीता। इसके तुरंत बाद त्रिपुनिथुरा के संस्कृत कॉलेज में ABVP की पूरी पैनल जीत ने छात्र राजनीति में चर्चा बढ़ा दी है।
छह प्रमुख पदों पर ये चेहरे जीते
चुनाव के प्रमुख नतीजों में स्निग्धा एम. हरि चेयरपर्सन, आदित्य टी. ए. वाइस चेयरपर्सन और विग्नेश भट्ट जनरल सेक्रेटरी चुने गए। वहीं विग्नेश डी. को मैगजीन एडिटर और अंजलि टी. को आर्ट्स क्लब सेक्रेटरी का पद मिला। निवेद्या के. एन. यूनिवर्सिटी यूनियन काउंसलर चुनी गईं।
इसके अलावा शिवानी आर. सेकेंड यूजी रिप्रेजेंटेटिव और अवनी सी. बी. सेकेंड पीजी रिप्रेजेंटेटिव चुनी गईं। उपलब्ध रिपोर्टों में ABVP के सभी 12 सामान्य पद जीतने की पुष्टि की गई है।
जीत पर ABVP ने क्या कहा?
ABVP ने इस नतीजे को SFI के रिकॉर्ड के खिलाफ छात्रों की प्रतिक्रिया बताया है। संगठन की ओर से SFI पर छात्र विरोधी नीतियों का आरोप लगाया गया और कहा गया कि इस जीत से केरल के दूसरे कॉलेज कैंपस में काम कर रही ABVP इकाइयों को भी मजबूती मिलेगी। ये दावे संगठन की ओर से किए गए हैं।
ABVP की ओर से संस्कृत को बढ़ावा देने, छात्र कार्यक्रमों और छात्र फंड के इस्तेमाल को लेकर भी पिछले छात्रसंघ पर सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों को संगठन के दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
त्रिपुनिथुरा में स्थानीय राजनीति का भी बदला समीकरण
त्रिपुनिथुरा में यह छात्रसंघ नतीजा ऐसे समय आया है जब स्थानीय नगरपालिका में भी राजनीतिक बदलाव हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक BJP ने नगरपालिका की कमान संभाली और वहां लंबे समय से चले आ रहे वाम नेतृत्व वाले शासन का अंत हुआ।
फिलहाल त्रिपुनिथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज का छात्रसंघ चुनाव इसलिए खास चर्चा में है क्योंकि जिस कैंपस में SFI का लंबे समय से प्रभाव रहा, वहां इस बार ABVP ने पूरा पैनल अपने नाम कर लिया।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लिए केरल में जीत को बड़ी कामयाबी माना जा रहा है क्योंकि दक्षिण भारतीय इस राज्य में आरएसएस समर्थित छात्र संगठन के फुटप्रिंटस न के बराबर रहे हैं। इससे केरल में एबीवीपी को पैर पसारने का मौका मिल सकता है।
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