पति-पत्नी अब रेलवे में अलग-अलग शहरों में नौकरी करने को मजबूर नहीं? नए नियमों में ट्रांसफर का रास्ता हुआ आसान | एक स्टेशन पर पोस्टिंग की कोशिश से लेकर शिकायत तक, जानिए क्या बदला

रेलवे बोर्ड ने अराजपत्रित कर्मचारियों के पति-पत्नी की पोस्टिंग और ट्रांसफर को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जानिए रेलवे कर्मचारी किन परिस्थितियों में जीवनसाथी के कार्यस्थल पर पोस्टिंग मांग सकते हैं।

नई दिल्ली। रेलवे की नौकरी करने वाले उन पति-पत्नी के लिए राहत की उम्मीद जगी है, जिन्हें नौकरी के कारण अलग-अलग शहरों में रहना पड़ता है। रेलवे बोर्ड ने अराजपत्रित कर्मचारियों से जुड़े पुराने प्रावधानों को नए सिरे से व्यवस्थित करते हुए साफ किया है कि पति-पत्नी को एक ही स्थान पर रखने की कोशिश प्रशासन को करनी चाहिए।

यह व्यवस्था सिर्फ उन दंपतियों तक सीमित नहीं है, जिनमें दोनों रेलवे कर्मचारी हैं। जीवनसाथी अगर केंद्र सरकार, राज्य सरकार या केंद्रीय-राज्य PSU में नौकरी करता है, तब भी रेलवे कर्मचारी के ट्रांसफर अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किए जाने का प्रावधान रखा गया है।

यानी मामला सिर्फ ट्रांसफर का नहीं, परिवार को एक साथ रखने की कोशिश का है।

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सबसे पहले देखें—दोनों पति-पत्नी रेलवे में हैं तो क्या होगा?

मान लीजिए पति और पत्नी दोनों रेलवे में नौकरी करते हैं। अगर दोनों एक ही सीनियरिटी यूनिट में हैं और जिस जगह पोस्टिंग मांगी गई है वहां उपयुक्त पद मौजूद है, तो प्रशासन को दोनों को उसी स्थान पर रखने की कोशिश करनी होगी।

हालांकि रेलवे ने एक व्यावहारिक शर्त भी रखी है—दोनों में से कोई भी अपने पति या पत्नी के अधीनस्थ के तौर पर काम नहीं करेगा।

अगर दोनों अलग-अलग सीनियरिटी यूनिट में हैं तो मामला थोड़ा अलग होगा। ऐसी जगह तलाशने की कोशिश होगी जहां दोनों की संबंधित यूनिट में पद उपलब्ध हो। वहां भी रास्ता नहीं निकलता तो कैटेगरी बदलने के अनुरोध पर नियमों के मुताबिक विचार किया जा सकता है।

जीवनसाथी रेलवे में नहीं है, तब भी आवेदन बेकार नहीं जाएगा

यह व्यवस्था केवल रेलवे-रेलवे दंपतियों के लिए नहीं है। अगर रेलवे कर्मचारी का पति या पत्नी ऑल इंडिया सर्विस या सेंट्रल सर्विस में है, तो रेलवे कर्मचारी को उसके तैनाती वाले स्थान या संबंधित रेलवे/मंडल/उत्पादन इकाई के क्षेत्र में रखने की कोशिश की जानी चाहिए। वहां उपयुक्त रेलवे पद ही नहीं है तो नजदीकी जगह को विकल्प बनाया जा सकता है।

राज्य सरकार की नौकरी वाले जीवनसाथी के मामले में भी इसी तरह का रास्ता है। रेलवे कर्मचारी को जीवनसाथी के कार्यस्थल वाले क्षेत्र में पोस्ट करने का प्रयास किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं हो सकता और रेलवे कर्मचारी जीवनसाथी का ट्रांसफर चाहता है, तो उसका अनुरोध संबंधित नियंत्रक अधिकारी तक भेजा जा सकता है।

PSU में नौकरी करने वाले जीवनसाथी को भी मिलेगा फायदा

अगर पति या पत्नी किसी केंद्रीय या राज्य PSU में काम करता है तो रेलवे कर्मचारी अपने विभाग से जीवनसाथी के कार्यस्थल पर पोस्टिंग मांग सकता है।

उपयुक्त पद होने पर सक्षम अधिकारी इस अनुरोध को सकारात्मक रूप से देख सकता है। पद नहीं हुआ तो आसपास की जगह देखी जा सकती है। और दोनों विकल्प नहीं बनते तो रेलवे कर्मचारी के अनुरोध को जीवनसाथी के विभाग के नियंत्रक अधिकारी तक भेजा जा सकता है।

असली बदलाव यहां है—‘प्रशासनिक कारण’ बताकर मामला खत्म नहीं होगा

नए निर्देशों का एक अहम पहलू यह है कि अगर पति या पत्नी के कार्यस्थल वाले स्टेशन पर रेलवे कर्मचारी के लिए उपयुक्त पद मौजूद है, फिर भी वहां पोस्टिंग नहीं दी जाती तो केवल प्रशासनिक कारण बताकर मामला खत्म नहीं किया जाना चाहिए।

कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी को फिर से कर्मचारी को उसी स्टेशन पर रखने का प्रयास करना होगा।

और अगर किसी वास्तविक कारण से यह संभव नहीं है तो कर्मचारी को उसकी स्पष्ट वजह बतानी होगी।

शिकायत की स्थिति में भी व्यवस्था बदली

मान लीजिए कर्मचारी ने जीवनसाथी के स्टेशन पर पोस्टिंग मांगी, लेकिन उसकी मांग स्वीकार नहीं हुई और उसे लगता है कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में शिकायत का फैसला सामान्यतः उसी अधिकारी के स्तर पर नहीं होगा जिसने मूल निर्णय लिया था।

शिकायत पर उस अधिकारी से कम से कम एक स्तर ऊपर का अधिकारी निर्णय करेगा।

इसके साथ ही ऐसे अभ्यावेदन और शिकायतों को समयबद्ध तरीके से निपटाने की बात कही गई है। मंडल और जोनल मुख्यालयों में ऐसे मामलों का अलग रिकॉर्ड रखने और उसकी समय-समय पर समीक्षा करने का विकल्प भी दिया गया है।

पत्नी रेलवे में है तो उसे भी बराबर अधिकार

रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सुविधा केवल पुरुष रेलवे कर्मचारियों तक सीमित नहीं होगी। अगर पत्नी रेलवे कर्मचारी है और पति किसी दूसरी सेवा में नौकरी करता है, तो पत्नी को भी वही सुविधा मिलेगी जो रेलवे कर्मचारी पति को मिलती।

2010 के पुराने मामलों का क्या होगा?

ये नए दिशा-निर्देश 2 फरवरी 2010 के पुराने निर्देशों को समेकित करते हुए जारी किए गए हैं। लेकिन पुराने निर्देशों के आधार पर जो मामले पहले ही तय हो चुके हैं, उन्हें दोबारा खोलने की जरूरत नहीं होगी।

एक और महत्वपूर्ण बात—ये प्रावधान मुख्य रूप से अराजपत्रित रेलवे कर्मचारियों के लिए हैं। राजपत्रित अधिकारियों के लिए पहले से लागू अलग निर्देश जारी रहेंगे।

रेलवे बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि बताए गए मामले केवल उदाहरण हैं। इसलिए किसी कर्मचारी की परिस्थिति इन उदाहरणों से अलग होने पर भी उसके जीवनसाथी के कार्यस्थल पर ट्रांसफर के अनुरोध को खारिज करने के बजाय अत्यंत सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए।

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