केंद्र सरकार रेलवे कॉलोनियों और वर्कशॉप को LPG सिलेंडर की जगह पाइपलाइन आधारित PNG नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी कर रही है। 18 सितंबर को PMO स्तर पर समीक्षा होगी।
नई दिल्ली। गैस सिलेंडर खत्म होने के बाद बुकिंग, सप्लाई और फिर रीफिल का इंतजार—रेलवे की बड़ी संख्या में कॉलोनियों और वर्कशॉप में लंबे समय से चली आ रही यह व्यवस्था अब बदलने की तैयारी में है। केंद्र सरकार रेलवे परिसरों को सिलेंडर आधारित व्यवस्था से निकालकर पाइपलाइन के जरिए प्राकृतिक गैस यानी PNG से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार इस योजना को रणनीतिक महत्व दे रही है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) इस पूरी कवायद की सीधे निगरानी कर रहा है।
18 सितंबर को खुलेगी तैयारियों की पूरी तस्वीर
इस योजना को लेकर 18 सितंबर को PMO स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक प्रस्तावित है। इसमें देश के सभी जोनल रेलवे को अपनी तैयारियों की स्थिति बतानी होगी—कितनी रेलवे कॉलोनियों में PNG पहुंची, कितने आवास इससे जुड़ चुके हैं और कितने वर्कशॉप अभी इस व्यवस्था से बाहर हैं।
रेलवे बोर्ड ने उत्तर मध्य रेलवे (NCR) समेत सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को उच्च प्राथमिकता पर यह जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। संबंधित इकाइयों से कहा गया है कि वे उपलब्ध आंकड़े तत्काल साझा करें, ताकि PMO के सामने योजना की वास्तविक स्थिति और आगे की कार्ययोजना रखी जा सके।
रेलवे की रसोई से वर्कशॉप तक बदलेगा गैस का तरीका
अभी कई रेलवे कॉलोनियों, कारखानों, कैंटीन और वर्कशॉप में LPG सिलेंडरों पर निर्भरता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने पर इसका असर सिलेंडर की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। नई व्यवस्था में कोशिश है कि जहां संभव हो, वहां ग्रिड आधारित PNG नेटवर्क विकसित किया जाए। पाइपलाइन के जरिए सीधे गैस पहुंचने से सिलेंडर की बुकिंग, रीफिल और स्टॉक रखने जैसी व्यवस्थाओं पर निर्भरता कम होगी। रेलवे के लिए यह सिर्फ सुविधा बदलने की कवायद नहीं है। इसके पीछे ऊर्जा आपूर्ति को ज्यादा स्थिर बनाने और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संकट का असर कम करने की रणनीति भी देखी जा रही है।
हर कॉलोनी का अक्षांश-देशांतर तक मांगा गया
रेलवे बोर्ड के अपर सदस्य पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन एस. जैन ने महाप्रबंधकों को रेलवे कॉलोनियों का विस्तृत डेटा जुटाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत कॉलोनियों का सटीक स्थान, कुल आवासों की संख्या और भौगोलिक लोकेशन यानी अक्षांश एवं देशांतर तक उपलब्ध कराने को कहा गया है। यह जानकारी स्थानीय अधिकृत गैस वितरण कंपनियों के साथ साझा की जाएगी, ताकि यह देखा जा सके कि किन स्थानों पर PNG नेटवर्क पहुंचाया जा सकता है और कहां इसके विस्तार की जरूरत होगी।
कर्मचारियों को सिलेंडर की चिंता से मिलेगी राहत
योजना पूरी तरह लागू होने पर रेलवे कर्मचारियों के आवासीय परिसरों में गैस की आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से होने की उम्मीद है। इससे सिलेंडर खत्म होने, नया सिलेंडर बुक कराने और उसकी डिलीवरी का इंतजार करने जैसी परेशानियां कम हो सकती हैं।
सरकार की नजर सिर्फ सुविधा पर नहीं, बल्कि सुरक्षित, अपेक्षाकृत किफायती और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर ईंधन व्यवस्था तैयार करने पर भी है।
अब 18 सितंबर की समीक्षा बैठक इस लिहाज से महत्वपूर्ण होगी कि देशभर में रेलवे को PNG नेटवर्क से जोड़ने की योजना अभी किस स्थिति में है और इसे जमीन पर उतारने के लिए अगला कदम क्या होगा।
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