सावन सोमवार पर डॉ. अनिता जैन ‘विपुला’ की भावपूर्ण शिव भक्ति कविता पढ़ें। भोलेनाथ, श्रद्धा, प्रेम और जीवन दर्शन का संदेश देती यह सुंदर रचना सावन के आध्यात्मिक महत्व को जीवंत करती है।
सावन की हर बूँद में भोलेनाथ का प्यार है,
हर सोमवार शिव-भक्ति का पावन त्योहार है।
धरती ने हरियाली की सुंदर चुनरी ओढ़ ली,
मानो माँ पार्वती ने फिर सृष्टि की गोद भर दी।
गंगा की निर्मल धारा शिव की जटाओं से बहती है,
चाँद की शीतल चाँदनी उनके मस्तक पर रहती है।
हिमालय-सा धैर्य सिखाते, सागर-सा विस्तार;
भोले बाबा की महिमा का, नहीं कहीं है पार।
मन यदि कैलास बन जाए, शिव उसमें बस जाते हैं;
श्रद्धा के दो सच्चे आँसू भी उन्हें बहुत भाते हैं।
भक्ति यदि बिल्व-पत्र जैसी सरल और पावन हो,
जीवन का हर कठिन रास्ता भी सुखद सावन हो।
भोलेनाथ का यही संदेश, निर्मल मन अपनाना है;
श्रद्धा, सेवा और प्रेम से जीवन सफल बनाना है।
जब जीवन में दुःख आए, शिव-सा धैर्य अपनाना;
कटुता का विष पीकर भी सबको प्रेम लुटाना।
क्रोध को शांत कर देना, करुणा का दीप जलाना;
यही शिव का पावन पथ है, यही जीवन का खजाना।
जीवन ओस की बूँद समान, पल में मिट जाता है;
पर शिव-नाम का उजियारा सदा साथ निभाता है।
सावन सोमवार हमें बस इतना याद दिलाता है—
अपने भीतर बैठे शिव को प्रेम से जगाना है।
हर प्राणी में शिव का अंश है, हर हृदय कैलास बने;
ॐ नमः शिवाय का मंगल-स्वर जीवन का प्रकाश बने।
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