भरतपुर के मुकुट मुखारविंद, पूंछरी का लोठा में अखिल भारतीय ब्रजभाषा कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। ‘ब्रज लोक बांसुरी’ पुस्तक का विमोचन हुआ और देशभर के कवियों ने काव्यपाठ किया।
भरतपुर। गिरिराज महाराज की पावन तलहटी स्थित मुकुट मुखारविंद, पूंछरी का लोठा मंगलवार को ब्रजभाषा, भक्ति और साहित्य के अनूठे संगम का साक्षी बना। राजस्थान जन सांस्कृतिक परिषद, ब्रज बानी सेवा समिति (ब्रज नगर) और गिरिराज धरण सेवक दल, भरतपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अखिल भारतीय ब्रजभाषा कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर तक मंत्रमुग्ध रखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वेद प्रकाश वेद (नगर) ने की, जबकि मेरठ के ललित तारा गीतकार मुख्य अतिथि रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. मोहकम सिंह सहजी, हरिश्चंद्र हरि तथा प्रो. डॉ. अशोक गुप्ता मौजूद रहे। मंच संचालन श्याम सिंह मधुर ने किया।
दुग्धाभिषेक से शुरुआत, कवियों का हुआ पारंपरिक सम्मान
कवि सम्मेलन से पहले सभी कवियों ने मुकुट मुखारविंद पर पहुंचकर गिरिराज महाराज का दुग्धाभिषेक, पूजा-अर्चना की। इसके बाद सभी आगंतुक कवियों का माला और साफा पहनाकर सम्मान किया गया। इस अवसर पर साहित्यकार लोकेश सिंघल की पुस्तक ‘ब्रज लोक बांसुरी’ का अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया।
विशेष उपाधियों से हुआ सम्मान
समारोह में समाजसेवी कुसुम कुमार गुप्ता को ‘पूंछरी का लोठा’ उपाधि से सम्मानित किया गया, जबकि मेरठ के ललित तारा को ‘ललिता सखी’ की सम्मानजनक उपाधि प्रदान की गई।
कविताओं में दिखे ब्रज, भक्ति, गुरु और राष्ट्र के रंग
कार्यक्रम का शुभारंभ हरिश्चंद्र हरि ने मां शारदे की वंदना से किया। इसके बाद एक-एक कर कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया।
- डॉ. मोहकम सिंह सहजी ने ‘श्याम मधुबन में आओ, संग में करेंगे रे किलोल…’ सुनाकर ब्रजभक्ति का रस बिखेरा।
- राकेश राजस्थानी ने ‘विरज भूमि को मूल स्वरूप जो देखौ वह है…’ के माध्यम से ब्रज की महिमा का वर्णन किया।
- राजेंद्र अनुरागी ने ‘ब्रजभूमि बहुत सुहावै है, बृजनंदन बंधन तेरो…’ प्रस्तुत किया।
- ललित तारा ने गुरु महिमा पर आधारित रचना ‘शिष्य को अपने सदा हर दिन गुरु सिखाएं…’ सुनाई।
- लोकेश सिंघल ने ‘बड़ों मजा आवे बैठे, जब हम पीपल की छांव में…’ से ग्रामीण जीवन की सहजता उकेरी।
- सुरेश सुनार ने बेटियों पर आधारित भावपूर्ण कविता ‘बेटियां होती हैं पंछी, पंख फैलाए आती हैं…’ प्रस्तुत की।
- आचार्य निर्मल (मथुरा) ने ‘मैया भारती की संतान को नमन है…’ से राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।
- अंजू सिंह (एटा) ने ‘दर्द का आवरण तुम बना लो मुझे…’ सुनाकर श्रोताओं की सराहना बटोरी।
- डी.के. हंसमुख ने ‘अपनी उंगली पर उठाया था जिसने गिरिराज…’ से श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण कराया।
- खेमेंद्र कुमार देव ने ‘जल-जलकर जो बुझेंगे उसे हम खाक कहते हैं…’ प्रस्तुत किया।
- श्याम सिंह मधुर ने ‘प्रेम के पियूष बड़ी बांसुरी बजावे श्याम…’ सुनाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
- वेद प्रकाश वेद ने ‘मौन हैं सारी दिशाएं, खो गया श्रृंगार साथी…’ से संवेदनाओं को स्वर दिया।
- हरी बाबू ओम ने ‘श्याम मेरौ श्यामा भयो, श्यामा है गई श्याम…’ सुनाया।
- हरेंद्र शर्मा ‘अऊ’ ने ‘हर जीव की हर सांस में मौजूद जो प्रश्न है…’ प्रस्तुत किया।
- प्रकाश चंद पाराशर ने ‘मेरे गीत के समीप, मेरी प्रीत के समीप…’ से कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी।
इनकी रही विशेष मौजूदगी
कवि सम्मेलन में भंडारी पवन सिंघल, भंडारी मोती मुखिया, भंडारी गोपाल शर्मा, भंडारी कुसुम कुमार गुप्ता, भंडारी धनेश कुमार, भंडारी गोविंद शरण सिंघल, भंडारी लतेश गोयल, भंडारी श्री चंद, भंडारी लोकेश सिंघल, दिलीप गुप्ता, तरुण सिंघल, सुरेश पटवारी, सिब्बौ पंडित एवं चंद्रेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में राजेंद्र अनुरागी ने सभी अतिथियों, कवियों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
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