राजस्थान में करीब 1150 विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट डॉक्टरों के स्टाइपेंड का मामला सामने आया है। अखिल राजस्थान चिकित्सक संघ ने एरियर सहित भुगतान और समान व्यवस्था की मांग की है।
जयपुर। विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर राजस्थान लौटे करीब 1150 मेडिकल ग्रेजुएट्स इस समय राज्य के अलग-अलग सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों और संबद्ध अस्पतालों में क्लिनिकल इंटर्नशिप कर रहे हैं। इंटर्नशिप के दौरान ये डॉक्टर अस्पतालों में नियमित रूप से अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं, लेकिन स्टाइपेंड का भुगतान नहीं होने का मुद्दा अब राजस्थान सरकार के सामने पहुंच गया है।
अखिल राजस्थान चिकित्सक संघ ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम पत्र भेजकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संघ का कहना है कि विदेश से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर लौटे विद्यार्थियों को भी नियमों के मुताबिक इंटर्नशिप के दौरान स्टाइपेंड मिलना चाहिए।
एक ही काम, लेकिन स्टाइपेंड में फर्क क्यों?
संघ ने अपने पत्र में मुद्दा सिर्फ भुगतान का नहीं, बल्कि समानता का बताया है। पत्र के मुताबिक राजस्थान के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों एवं संबद्ध चिकित्सालयों में विदेश से एमबीबीएस कर लौटे करीब 1150 डॉक्टर निर्धारित अवधि की क्लिनिकल इंटर्नशिप और ड्यूटी कर रहे हैं।
संघ का कहना है कि इन चिकित्सकों से अस्पतालों में नियमित रूप से सेवाएं ली जा रही हैं, लेकिन इंटर्नशिप के दौरान उन्हें स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा। दूसरी ओर, पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार विदेश से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर लौटे विद्यार्थियों को भी नियमानुसार इंटर्नशिप एवं स्टाइपेंड का लाभ मिलना चाहिए।
यही अंतर अब सवाल बनकर सामने आया है कि जब इंटर्नशिप की ड्यूटी समान है, तो स्टाइपेंड के मामले में अलग व्यवस्था क्यों?
संघ ने रखीं चार प्रमुख मांगें
अखिल राजस्थान चिकित्सक संघ ने सरकार से चार बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की है—
- राजस्थान में इंटर्नशिप कर रहे सभी एफएमजी डॉक्टरों को नियमानुसार स्टाइपेंड प्रदान किया जाए।
- पूर्व अवधि से लंबित स्टाइपेंड का भी एरियर सहित भुगतान किया जाए।
- स्टाइपेंड को लेकर वित्त विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के बीच लंबित प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए।
- भविष्य में एफएमजी इंटर्न डॉक्टरों के साथ किसी भी प्रकार की असमानता या भेदभाव नहीं हो, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
संघ ने पत्र में उम्मीद जताई है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री इस मामले की गंभीरता को देखते हुए करीब 1150 युवा चिकित्सकों के हित में जल्द सकारात्मक निर्णय लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देंगे।
पत्र पर इन पदाधिकारियों के हस्ताक्षर
इस मांग-पत्र पर अखिल राजस्थान चिकित्सक संघ के प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें—
- डॉ. राजेश कुमावत — प्रदेश अध्यक्ष
- डॉ. विकास बुडानिया — प्रदेश उपाध्यक्ष
- डॉ. नीरज मीणा — संरक्षक
- डॉ. रणजीत चौधरी — महासचिव
- डॉ. महेंद्र बड़ाला — प्रदेश प्रवक्ता
शामिल हैं।
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