उदयपुर स्थित MPUAT के कॉलेज ऑफ डेयरी एंड फूड टेक्नोलॉजी में गुरु पूर्णिमा महोत्सव आयोजित हुआ। कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने गुरु-शिष्य परंपरा पर विचार रखे, विद्यार्थियों ने कविता और भाषण प्रस्तुत किए।
उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) के कॉलेज ऑफ डेयरी एंड फूड टेक्नोलॉजी में मंगलवार को गुरु पूर्णिमा श्रद्धा, संस्कार और भारतीय परंपरा के अनुरूप उत्साहपूर्वक मनाई गई। गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित इस आयोजन में शिक्षकों के प्रति सम्मान, ज्ञान के महत्व और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह रहे।
गुरु परंपरा पर हुआ मंथन
सहायक छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. कमलेश कुमार मीणा ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद कॉलेज ऑफ डेयरी एंड फूड टेक्नोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. निकिता वाधवान ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और भारतीय संस्कृति में गुरु के सर्वोच्च स्थान को रेखांकित किया।
इसके पश्चात डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा ने मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के गौरवशाली इतिहास, उसके सांस्कृतिक महत्व और नैतिक मूल्यों पर प्रेरक व्याख्यान दिया।
‘गुरु केवल शिक्षक नहीं, जीवन के पथप्रदर्शक हैं’
मुख्य अतिथि डॉ. प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु का दायित्व केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और जीवन-दृष्टि का निर्माण करना भी है। उन्होंने आचार्य द्रोणाचार्य के जीवन का उल्लेख करते हुए गुरु के आदर्श स्वरूप और शिष्य के कर्तव्यों को विस्तार से समझाया।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, अनुशासन और समर्पण की भावना बनाए रखें, क्योंकि यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने जीता सभी का मन
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विद्यार्थियों आयुष शर्मा, कृति सुंदर दास, किरण और पूजा ने गुरु महिमा पर आधारित विचार, कविता और प्रेरक भाषण प्रस्तुत किए। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और विद्यार्थियों को भावविभोर कर दिया।
150 विद्यार्थियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कमलेश कुमार मीणा ने सभी अतिथियों, आयोजकों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर इंजीनियर कुसुम मेघवाल, महाविद्यालय के संकाय सदस्य, अशैक्षणिक कर्मचारी तथा लगभग 150 विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन गुरुजनों के प्रति सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लेकर किया गया।
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