आज सेवा करें, कल ज़रूरत पड़े तो मदद मिलेगी | भरतपुर में शुरू हुआ ‘समय बैंक’, समय ही बनेगा आपकी सामाजिक सुरक्षा

भरतपुर के अपनाघर आश्रम ने ‘समय बैंक’ की अनोखी पहल शुरू की है। अब लोग सेवा देकर अपना समय जमा कर सकेंगे और भविष्य में जरूरत पड़ने पर उसी समय के बदले देखभाल, अस्पताल सहयोग और अन्य मानवीय सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे।

राजेश खंडेलवाल
राजेश खंडेलवाल, वरिष्ठ पत्रकार

भरतपुर।  क्या आपने कभी सोचा है कि बैंक में पैसे नहीं, बल्कि अपना समय जमा किया जा सकता है? और वही समय भविष्य में आपकी सबसे बड़ी जरूरत के वक्त मददगार बन सकता है। भरतपुर में अब ऐसी ही अनोखी पहल शुरू हुई है, जहां इंसान की सबसे बड़ी पूंजी—उसका समय—ही सामाजिक सुरक्षा का आधार बनेगा।

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समाज सेवा के क्षेत्र में नई सोच के साथ भरतपुर के अपनाघर आश्रम ने ‘समय बैंक’ की शुरुआत की है। इस व्यवस्था में कोई भी स्वस्थ और सक्षम व्यक्ति आश्रम में सेवा कार्यों के लिए अपना समय देगा और बदले में वही समय उसके व्यक्तिगत खाते में जमा होता जाएगा। जब भविष्य में उसे किसी कारण से सहारे, देखभाल या सहायता की जरूरत होगी, तब वह अपने जमा किए गए समय के बराबर सेवाएं प्राप्त कर सकेगा।

इस योजना के तहत स्वयंसेवक प्रभुजनों की देखभाल, अस्पताल ले जाने, जांच व उपचार के दौरान सहयोग, भोजन वितरण, पुनर्वास गतिविधियों या अन्य सेवा कार्यों में जितना समय देंगे, उतना समय उनके खाते में सुरक्षित दर्ज होगा। यह ठीक उसी तरह होगा जैसे कोई व्यक्ति भविष्य के लिए बचत करता है, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां बचत पैसे की नहीं, सेवा के समय की होगी।

यह पहल खासतौर पर उन वरिष्ठ नागरिकों, अकेले रहने वाले दंपतियों और ऐसे परिवारों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है, जिनके बच्चे पढ़ाई, नौकरी या अन्य कारणों से देश या विदेश में रहते हैं। ऐसे लोगों को जरूरत पड़ने पर अस्पताल, इलाज या दैनिक सहयोग के लिए भरोसेमंद सहायता मिल सकेगी।

अपनाघर आश्रम ने बताया कि इस मॉडल की प्रेरणा जापान में सफल रहे समय आधारित सेवा तंत्र से ली गई है, लेकिन इसे भरतपुर और आसपास की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि यहां के लोगों को व्यावहारिक लाभ मिल सके।

योजना को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। प्रत्येक सदस्य का पंजीकरण होगा, पहचान और पते का सत्यापन किया जाएगा तथा सेवा देने और पूरी करने का पूरा रिकॉर्ड बायोमेट्रिक या डिजिटल प्रणाली के जरिए सुरक्षित रखा जाएगा। उसी आधार पर संबंधित व्यक्ति के खाते में समय जमा होगा।

इस योजना से महिला और पुरुष दोनों जुड़ सकेंगे। महिलाओं को आवश्यकता पड़ने पर महिला सहयोगियों के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सदस्यों की सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यह सुविधा मुख्य रूप से भरतपुर क्षेत्र के लिए तैयार की गई है, हालांकि चिकित्सा या विशेष परिस्थितियों में आवश्यकता अनुसार भरतपुर से बाहर भी सहयोग उपलब्ध कराया जा सकेगा।

योजना का एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि अर्जित किया गया समय केवल वही व्यक्ति उपयोग कर सकेगा जिसने उसे सेवा देकर कमाया है। इसे किसी परिजन, उत्तराधिकारी या अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी समय स्वयंसेवक उपलब्ध नहीं होते हैं तो अपनाघर आश्रम के प्रशिक्षित सेवा साथी सहायता के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि किसी सदस्य को समय पर मदद मिल सके।

अपनाघर आश्रम के संस्थापक डॉ. बीएम भारद्वाज का कहना है कि यह योजना केवल समय जमा करने की व्यवस्था नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व पर आधारित एक जनआंदोलन है। उनका कहना है कि आज सेवा में दिया गया समय, भविष्य में जरूरत पड़ने पर किसी व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा सामाजिक सहारा बन सकता है

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