भरतपुर के अपनाघर आश्रम ने ‘समय बैंक’ की अनोखी पहल शुरू की है। अब लोग सेवा देकर अपना समय जमा कर सकेंगे और भविष्य में जरूरत पड़ने पर उसी समय के बदले देखभाल, अस्पताल सहयोग और अन्य मानवीय सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे।
Category: समाज
ना चूल्हा, ना अकेलापन | गुजरात का वह गांव जहां पूरा जीवन एक ही रसोई के इर्द-गिर्द धड़कता है
गुजरात (Gujarat) के मेहसाणा (Mehsana) जिले का चंदानकी गांव (Chandanaki), जहां कोई घर पर खाना नहीं बनाता। कम्युनिटी किचन के जरिए बुजुर्गों के अकेलेपन से लड़ते इस अनोखे गांव की…
जहां सास बनी ममता की छांव, वहीं बहू का ससुराल बना प्रेम का गांव | परिवारों को जोड़ने और टूटते रिश्तों को संवारने की RSS की अनूठी कोशिश
रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते, कुछ रिश्ते प्यार, सम्मान और समझ के धागों से भी बुने जाते हैं। ऐसा ही एक अनोखा आयोजन हुआ, जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से सास-बहू सम्मेलन
जहां सास बनी ममता की छांव, वहीं बहू का ससुराल बना प्रेम का गांव | परिवारों को जोड़ने और टूटते रिश्तों को संवारने की RSS की अनूठी कोशिश
रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते, कुछ रिश्ते प्यार, सम्मान और समझ के धागों से भी बुने जाते हैं। ऐसा ही एक अनोखा आयोजन हुआ, जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से सास-बहू सम्मेलन
जिस दिन तीसरी या चौथी संतान हुई, उसी दिन उस बच्चे के नाम 50 हजार की एफडी | घटती आबादी के कारण इस समाज ने किया ये फैसला
जी हां; सही पढ़ा आपने। देश का एक समाज ऐसा है जिसने अपने कार्यों से समाज के सभी वर्गों में अपना लोहा तो मनवाया है; लेकिन घटती आबादी ने
अपनों से दुत्कारी महिलाएं बरसों से रख रही हैं करवा-चौथ का व्रत |‘अपना घर आश्रम’ बना इनका सहारा
भरतपुर का अपना घर आश्रम। ये वो घर है जिसे 90 महिलाओं ने अब अपना ही घर बना लिया है। और ये वो महिलाएं हैं जिनको उनके परिवार के लोगों ने
सुखद खबर: वाल्मीकि समाज की बेटी के सिर से उठा पिता का साया तो गांवों वालों ने निभाई ब्याह की सारी रस्में
राजस्थान का एक जिला है जालौर और इस जिला मुख्यालय से दस किमी दूर एक गांव है सांकरणा। जातिगत विद्वेष के बीच इस गांव से बेहद सुखद खबर आई है। और इसी सुखद खबर ने इस गांव को
सावन लागौ चले पुरवैया उड़जा काग लिवा ला भईया. . .
श्रावण मास में युवतियों का सबसे प्यारा त्यौहार तीज है। वर्षा ऋतु में चारों तरफ की धरा भी सघन हरितिमा से मुस्कराने लगती है। चारों ओर उमंग और उल्लास का
जिस शख्स को मृत मानकर कर दिया ब्रह्मभोज, 25 साल बाद भरतपुर में मिला, उड़ीसा से आया बेटा पिता को देख बिलख पड़ा
उड़ीसा के कटक में जिस शख्स को मृत मानकर ब्रह्मभोज कर दिया गया वह शख्स भरतपुर के अपना घर आश्रम में मिल गया। उड़ीसा से जब बेटा पिता को लेने यहां पहुंचा पिता-पुत्र दोनों
असहायों के लिए ‘अन्नपूर्णा’ बना भरतपुर ऑयल मिलर्स एसोसिएशन
भरतपुर ऑयल मिलर्स एसोसिएशनअसहायों के लिए ‘अन्नपूर्णा’ बनकर सामने आया जब उसने सोमवार से उनके लिए निशुल्क भोजन व्यवस्था शुरू की। पहले दिन ही बड़ी संख्या में असहाय लोग
