अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कफ सिरप | केंद्र सरकार ने खत्म की बड़ी छूट, छोटे गांवों में भी सख्त नियम लागू

केंद्र सरकार ने कफ सिरप की बिक्री पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब डॉक्टर की पर्ची के बिना कफ सिरप नहीं मिलेगा। छोटे गांवों में भी बिना लाइसेंस बिक्री की छूट समाप्त कर दी गई है।

नई दिल्ली। अब मेडिकल स्टोर पर जाकर बिना डॉक्टर की पर्ची के कफ सिरप खरीदने का दौर खत्म हो गया है। केंद्र सरकार ने आम जनता, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कफ सिरप की बिक्री पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। नए नियमों के तहत अब खांसी की सिरप केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से ही और डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही मिल सकेगी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 927 (ई) जारी की है। यह संशोधन दिसंबर 2025 में अधिसूचित किया गया था और अब पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो चुका है।

क्या बदला?

सरकार ने औषधि नियम, 1945 की अनुसूची ‘K’ की प्रविष्टि संख्या 13 से ‘सिरप’ शब्द हटा दिया है। इसके साथ ही 1000 से कम आबादी वाले गांवों में बिना लाइसेंस कफ सिरप बेचने की जो विशेष छूट थी, उसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

अब देश के किसी भी हिस्से में कफ सिरप की बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानों के माध्यम से होगी और इसके लिए डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य होगी।

आखिर क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हाल के वर्षों में कफ सिरप के दुरुपयोग, अनियंत्रित बिक्री और गुणवत्ता से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी देखी गई। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं दिए जाने को लेकर चिंता जताई गई थी।

इन्हीं जोखिमों को देखते हुए सरकार ने पुरानी छूट खत्म कर दी ताकि दवाओं का जिम्मेदार वितरण सुनिश्चित किया जा सके और मरीजों की सुरक्षा बढ़ाई जा सके।

पहले क्या था नियम?

आमतौर पर कफ सिरप में इस्तेमाल होने वाली कई दवाएं पहले से ही अनुसूची H और H1 के अंतर्गत आती हैं, जिनके लिए डॉक्टर की पर्ची आवश्यक होती है। हालांकि अनुसूची K के तहत 1000 से कम आबादी वाले गांवों में घरेलू उपचार के लिए कफ सिरप उपलब्ध कराने की विशेष छूट दी गई थी।

सरकार का कहना है कि बदलते हालात और बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए इस व्यवस्था को जारी रखना उचित नहीं था।

मरीजों को क्या होगा फायदा?

नए नियम लागू होने के बाद मरीजों को दवा का सही उपयोग, उचित खुराक, सेवन की अवधि, संभावित दुष्प्रभाव और जरूरी सावधानियों की जानकारी विशेषज्ञों से मिल सकेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किन मरीजों या आयु वर्गों में दवा का इस्तेमाल सावधानी के साथ किया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना चिकित्सकीय सलाह के कफ सिरप का सेवन कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। नई व्यवस्था से फार्मेसियों की जवाबदेही बढ़ेगी और बिना वैध पर्चे के बिक्री पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

सरकार ने क्या कहा?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले भी शहरी क्षेत्रों और ऑनलाइन माध्यम से कफ सिरप की बिक्री के लिए वैध चिकित्सकीय पर्चा और पंजीकृत फार्मेसी के माध्यम से वितरण अनिवार्य था। अब यह व्यवस्था छोटे और दूरदराज के गांवों में भी समान रूप से लागू होगी।

सरकार का कहना है कि इस फैसले से पूरे देश में कफ सिरप की उपलब्धता, वितरण और निगरानी अधिक प्रभावी होगी तथा दवाओं के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

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