गीता से बिज़नेस का गुरुमंत्र | राजस्थान चैम्बर में ‘कर्मयोग’ से नेतृत्व और मैनेजमेंट पर खास सत्र

जयपुर में राजस्थान चैम्बर द्वारा भगवद गीता के सिद्धांतों के माध्यम से बिज़नेस लीडरशिप और मैनेजमेंट कौशल पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उद्योगपतियों और युवा उद्यमियों ने भाग लिया।

जयपुर 

व्यापार और उद्योग की दुनिया में सफलता के नए सूत्र तलाशने के लिए जयपुर में एक अलग तरह का सत्र आयोजित किया गया, जहां भगवद गीता के सिद्धांतों को आधुनिक बिज़नेस मैनेजमेंट से जोड़कर समझाया गया।

यह ज्ञानवर्धक सत्र राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा अपने सदस्यों और सहयोगी संस्थाओं के लिए आयोजित किया गया, जिसमें विषय रखा गया— ‘भगवद गीता के माध्यम से व्यवसायिक उन्नयन, नेतृत्व विकास एवं प्रबंधन कौशल’

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कार्यक्रम का आयोजन Gauraanga Institute of Vedic Education (GIVE) के सहयोग से किया गया। सत्र का उद्देश्य यह समझाना था कि भारतीय संस्कृति के महान ग्रंथ भगवद गीता में बताए गए सिद्धांत आज के प्रतिस्पर्धी व्यापारिक माहौल में किस तरह मार्गदर्शक बन सकते हैं।

‘कर्मयोग’ से नेतृत्व तक की सीख

सत्र में GIVE के संस्थापक और शिक्षा गुरु वृन्दावन चन्द्र दास ने “Essence of Bhagwat Geeta” विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया।

उन्होंने कहा कि गीता का मूल संदेश है— कर्म पर ध्यान, फल की चिंता से मुक्त होकर कार्य करना। यही सिद्धांत व्यवसाय में सही निर्णय लेने, तनाव प्रबंधन और नैतिकता बनाए रखने में मदद करते हैं।

उन्होंने उद्यमियों को समझाया कि सकारात्मक सोच, आत्म-अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा जैसे सिद्धांत केवल आध्यात्मिक जीवन में ही नहीं, बल्कि कॉरपोरेट नेतृत्व और संगठन प्रबंधन में भी बेहद प्रभावी हैं।

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इन प्रमुख विषयों पर हुई चर्चा

सत्र के दौरान गीता के कई व्यावहारिक पहलुओं को व्यापारिक दृष्टिकोण से समझाया गया, जैसे—

  • कर्म पर केंद्रित रहना और परिणाम की चिंता से मुक्त होना
  • विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और संतुलन बनाए रखना
  • नैतिकता और ईमानदारी के साथ कार्य करना
  • नेतृत्व में स्पष्टता और निर्णय क्षमता विकसित करना
  • टीम मैनेजमेंट और सकारात्मक कार्य संस्कृति बनाना

अध्यक्ष बोले—सफलता के लिए संतुलन जरूरी

इस अवसर पर चैम्बर के अध्यक्ष डॉ. के. एल. जैन ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में केवल आर्थिक सफलता ही पर्याप्त नहीं है। व्यवसाय में नैतिकता, संतुलन और दूरदृष्टि का होना भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि गीता के सिद्धांत कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं और उद्यमियों को दीर्घकालीन सफलता की दिशा दिखाते हैं।

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बड़ी संख्या में उद्योग जगत की भागीदारी

कार्यक्रम में चैम्बर के कार्यकारी अध्यक्ष डी. एस. भण्डारी, डॉ. आर. एस. जैमिनी, सुधीर पालीवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. अरुण अग्रवाल, उपाध्यक्ष ज्ञान प्रकाश, मानद महासचिव आनंद महरवाल, बृज बिहारी शर्मा, विजय गोयल, एन. के. जैन सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

साथ ही चैम्बर के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर योगेश नारायण माथुर, सचिव दिनेश कानूनगो, अतिरिक्त सचिव कन्हैया लाल जांगिड़ तथा बड़ी संख्या में उद्योगपति, युवा उद्यमी और स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने सत्र में भाग लेकर लाभ प्राप्त किया।

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