नए साल के नए पृष्ठ पर, लिख दें कुछ हंसती खुशियां
इस सृष्टि के जन्मविधाता, पालनहार तुम्ही हो दाता,
घर-घर जाकर दीप जला दूं, खुशियों का उजियारा कर दूं।
कुछ नई जगहें, कुछ लोग नए…
न्याय – कर्म की धार धरो…
है दंभ बहुत मुझको – तुझको, दिखती खामी सब औरों की
जीवन की आपाधापी में,क्या पाया कितना छूट गया…