जिंदगी की सच्चाई

ये जिंदगी है, सबकी अलग सी,
कहीं खुश है, तो कहीं परेशान सी

खुशियां सजाएं

आओ, कुछ खूबसूरत ख्वाबों को देखें,
सखियों के संग, कुछ कहकहे लगा लें,
कुछ देर तो विश्राम लें, अपने कामों से,
मायके को याद कर थोड़ा मुस्कुरा लें।

नूतन वर्षाभिनंदन…

नए साल के नए पृष्ठ पर, लिख दें कुछ हंसती खुशियां

जीवन संघर्ष

इस सृष्टि के जन्मविधाता, पालनहार तुम्ही हो दाता,

घर-घर जाकर दीप जला दूं…

घर-घर जाकर दीप जला दूं,
खुशियों का उजियारा कर दूं।

न्याय – कर्म की धार धरो…

न्याय – कर्म की धार धरो…

हो पुरुषार्थ प्रखर…

है दंभ बहुत मुझको – तुझको, दिखती खामी सब औरों की

क्या पाया कितना छूट गया…

जीवन की आपाधापी में,क्या पाया कितना छूट गया…