डीग कांग्रेस में निकाय चुनाव से पहले अंदरूनी गुटबाजी सामने आई। वार्ड प्रभारियों की सूची में विश्वेंद्र सिंह का नाम नहीं होने पर पूर्व मंत्री ने जिलाध्यक्ष राजीव सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
डीग। स्थानीय निकाय चुनावों की आहट के बीच डीग कांग्रेस में टिकट और संगठन से पहले ही सम्मान और सियासी हैसियत की लड़ाई सामने आ गई है। निकाय चुनाव के लिए जारी वार्ड प्रभारियों की सूची ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को फिर सार्वजनिक कर दिया है। विवाद की सबसे बड़ी वजह यह बनी कि सूची में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, सांसद संजना जाटव, जिला प्रभारी देशराज मीणा और सह-प्रभारी हिम्मत सिंह समेत कई नेताओं के नाम दर्ज हैं, लेकिन पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह का नाम सूची में नहीं है।
मामला उस वक्त और गरमा गया, जब उनके नाम की जगह सिर्फ ‘कांग्रेस प्रत्याशी विधानसभा डीग-कुम्हेर’ लिख दिया गया। पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने इसे महज शब्दों का अंतर नहीं माना और सीधे जिलाध्यक्ष राजीव सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
एक लाइन ने बढ़ा दी कांग्रेस की अंदरूनी गर्मी
विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए जारी संदेश में सूची पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे वरिष्ठ नेताओं को नीचा दिखाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर सोची-समझी साजिश के तहत ऐसा किया जा रहा है।
पूर्व मंत्री ने अपने राजनीतिक सफर का हवाला देते हुए लिखा कि वह एक बार जिला प्रमुख, तीन बार सांसद, तीन बार विधायक और दो बार कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। ऐसे में उनका नाम हटाकर केवल ‘कांग्रेस प्रत्याशी विधानसभा डीग-कुम्हेर’ लिखे जाने को उन्होंने अपमानजनक बताया।
उनका कहना है कि जिलाध्यक्ष राजीव सिंह की इस कथित ‘ओछी मानसिकता’ का असर निकाय चुनाव में कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों को जनता चुनाव में जवाब दे सकती है।
डीग में पुरानी खींचतान फिर सतह पर
दरअसल, डीग जिले के गठन और स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों के साथ ही कांग्रेस के स्थानीय संगठन में चल रही खींचतान कई बार सामने आ चुकी है। विश्वेंद्र सिंह इससे पहले भी जिला संगठन की निष्क्रियता और राहुल गांधी के कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर स्थानीय नेतृत्व पर सवाल उठा चुके हैं।
अब वार्ड प्रभारियों की सूची ने उसी विवाद को एक बार फिर हवा दे दी है। एक तरफ प्रदेश नेतृत्व और संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के नाम सूची में जगह पा रहे हैं, दूसरी ओर पूर्व मंत्री को महज ‘पूर्व प्रत्याशी’ जैसे संदर्भ वाले संबोधन तक सीमित किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चुनाव से पहले गुटबाजी कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी?
डीग और कुम्हेर की नगर पालिकाओं तथा नगर परिषदों में चुनावी गतिविधियां तेज होने के साथ कार्यकर्ताओं के बीच इस विवाद की चर्चा भी बढ़ रही है। स्थानीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि अगर पार्टी ने समय रहते अंदरूनी टकराव को नहीं संभाला तो इसका सीधा असर चुनावी मैदान में दिखाई दे सकता है।
निकाय चुनाव से ठीक पहले सामने आया यह विवाद सिर्फ एक सूची में नाम होने या न होने तक सीमित नहीं दिख रहा। इसके पीछे डीग कांग्रेस में चल रही सियासी खींचतान, नेतृत्व की पकड़ और गुटों के बीच बढ़ते तनाव की तस्वीर भी साफ दिखाई दे रही है। अब नजर इस बात पर है कि प्रदेश कांग्रेस इस पूरे मामले को किस तरह संभालती है और चुनावी तैयारी के बीच संगठन की यह दरार कितनी गहरी जाती है।
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