भरतपुर में BDA की लैण्ड पुलिंग योजना के विरोध में 3 जून को किसानों की बड़ी बैठक होगी। रामनगर, मलाह, नगला सैह समेत कई गांवों के किसान आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे।
भरतपुर
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भरतपुर विकास प्राधिकरण (BDA) की लैण्ड पूलिंग योजना को लेकर किसानों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा। मुख्यमंत्री को हजारों किसानों की ओर से ज्ञापन सौंपे जाने के एक सप्ताह बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए अब किसान एक बार फिर बड़ी रणनीतिक बैठक करने जा रहे हैं।
लैण्ड पूलिंग योजना विरोधी किसान मोर्चा ने 3 जून, बुधवार को शाम 4 बजे डालमिया डेयरी के पास स्थित लटूरिया वाले हनुमानजी मंदिर में प्रभावित किसानों और भूखण्डधारियों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में BDA की योजना के खिलाफ आगे की लड़ाई का खाका तैयार किया जाएगा।
किसान मोर्चा का कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य, रोजगार और आजीविका का सवाल है। इसलिए बैठक में आंदोलन को और तेज करने तथा चरणबद्ध संघर्ष की रूपरेखा पर विचार किया जाएगा।
इन गांवों से पहुंचेगा किसान समुदाय
बैठक में रामनगर, मलाह, नगला सैह, रामपुरा, नगला झीलरा, झीलरा, मडौली जाट, तेरहिया नगला, खडैरा, कूम्हां, चक रामनगर, श्योराना, मुरवारा, तुहिया, जिरौली, मडरपुर और वराखुर सहित अनेक गांवों के किसान, भूखण्डधारी और किसान नेता भाग लेंगे।
‘ज्ञापन दिया, लेकिन जवाब नहीं मिला’
किसान मोर्चा के संयोजक दौलत सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले हजारों किसानों ने रैली निकालकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था और मांग की थी कि किसानों पर जबरन थोपी जा रही लैण्ड पुलिंग योजना से उन्हें राहत दी जाए। लेकिन अब तक न राज्य सरकार, न जिला प्रशासन और न ही BDA की ओर से कोई सकारात्मक कदम उठाया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके उलट प्रभावित किसानों और भूखण्डधारियों पर दबाव बनाने की कोशिशें बढ़ी हैं। किसानों का दावा है कि कई स्थानों पर जमीन और भूखण्डों की चारदीवारियों को तोड़कर दबाव का माहौल बनाया जा रहा है।
‘जमीन बचाने की लड़ाई और तेज होगी’
किसान नेताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। बैठक में इस बात पर भी चर्चा होगी कि BDA की कार्रवाई से प्रभावित किसानों और भूखण्डधारियों को किस प्रकार राहत दिलाई जाए तथा कानूनी, सामाजिक और जनआंदोलन के स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाएं।
किसान मोर्चा का दावा है कि अब गांव-गांव से किसान एकजुट हो रहे हैं और अपनी कृषि भूमि तथा संपत्तियों को बचाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन की राह पर आगे बढ़ेंगे। 3 जून की बैठक को इसी संघर्ष की अगली बड़ी कड़ी माना जा रहा है।
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