‘अगर मैं ही डॉक्टर-मंत्री हूं तो गिरफ्तार करो’ : ACB दफ्तर पहुंचकर किरोड़ी का सीधा चैलेंज, बोले- मुझे बदनाम करने की साजिश

नकली बीज घोटाला मामले में मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ACB मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने एफआईआर लीक होने पर सवाल उठाए और कहा कि अगर वे दोषी हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त नया सियासी तूफान खड़ा हो गया, जब कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अचानक एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) मुख्यालय पहुंच गए। नकली बीज घोटाले की जांच के बीच उन्होंने एसीबी पर ही सवालों की बौछार कर दी और दो टूक कहा— ‘अगर जांच में जिस डॉक्टर और मंत्री का जिक्र है, वह मैं हूं तो मुझे तुरंत गिरफ्तार कर लीजिए।’

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ACB महानिदेशक से मुलाकात के बाद मीडिया से रूबरू हुए किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि एजेंसी की कार्रवाई पर उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन जिस तरह उनके नाम को विवादों में घसीटा जा रहा है, उससे जनता के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष के गोविंद सिंह डोटासरा और अशोक गहलोत पर भी बिना नाम लिए नहीं छोड़ा और आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक तौर पर घेरने की कोशिश की जा रही है।

किरोड़ी ने माना कि उनके लिए सूचना जुटाने वाला व्यक्ति इस मामले में गड़बड़ी करते हुए पकड़ा गया, लेकिन इससे उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने गलत किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना तथ्य उनके नाम को उछालना राजनीति से प्रेरित लगता है।

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मंत्री ने सबसे बड़ा सवाल एफआईआर लीक को लेकर उठाया। उन्होंने दावा किया कि आधिकारिक एफआईआर दर्ज होने से पहले ही उसका मजमून बाहर कैसे आ गया? उन्होंने कहा कि 9 जून को वेबसाइट पर एफआईआर अपलोड हुई, लेकिन 8 जून को ही उसकी सामग्री वायरल हो चुकी थी। आखिर जांच की गोपनीय जानकारी बाहर किसने पहुंचाई?

किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि वे इसी सवाल का जवाब लेने ACB पहुंचे हैं। उन्होंने एजेंसी से साफ शब्दों में पूछा कि जिस ‘डॉक्टर और मंत्री’ का उल्लेख किया जा रहा है, उसका नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? अगर वह व्यक्ति वे हैं तो कानून अपना काम करे, लेकिन अगर नहीं हैं तो जनता के सामने सच रखा जाए।

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मंत्री ने यहां तक कह दिया कि उन्हें महसूस हो रहा है कि एसीबी पर किसी तरह का दबाव है और उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जांच एजेंसियों को राजनीतिक हथियार नहीं बनना चाहिए और उन्हें अपनी संवैधानिक मर्यादा में रहकर काम करना चाहिए।

किरोड़ी के इस आक्रामक तेवर के बाद अब निगाहें ACB की अगली कार्रवाई और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिक गई हैं। ऐसे में नकली बीज घोटाले की जांच अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि सियासी लड़ाई का भी बड़ा मुद्दा बनती नजर आ रही है।

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