नई दिल्ली
रेलवे कर्मचारियों के लिए एक खुश खबर। अब किसी मामले को लेकर डिमोट यानी पदावनत होने या दंड मिलने पर रेलवे कर्मचारियों को एसी में सफर करने का अधिकार नहीं छिनेगा। कर्मचारियों व उसके परिवार वालों को एसी में सफर करने का नि:शुल्क यात्रा पास मिलता रहेगा। इस बाबत रेलवे बोर्ड ने आदेश जारी कर दिए हैं।
आपको बता दें कि रेलवे गलती करने पर कर्मचारियों को पदावनत या वेतनमान कम करने जैसे दंड देता है। इस पर उनकी कुछ सुविधाएं भी छीन ली जाती हैं। दंड खत्म होने के बाद फिर से कर्मचारियों को पुराना वेतनमान मिलना शुरू हो जाता है। यह दंड दो या तीन साल तक के लिए होता है। रेलवे यूनियन इसका विरोध करती रही हैं। यूनियंस ने रेलवे बोर्ड के साथ वार्ता के दौरान यह मसला उठाया था। अब रेलवे बोर्ड ने इस मसले का हल कर दिया है। रेलवे बोर्ड ने आदेश जारी कर कहा है कि पदावनत या कोई और मामूली दंड मिलने पर रेलवेकर्मियों को मिलने वाली सुविधाएं छीनी नहीं जाएंगी।
आदेश के अनुसार पदावनत होने या दंड पाने वाले कर्मचारियों को एसी में सफर करने का अधिकार नहीं छिनेगा, कर्मचारियों व उसके परिवार वालों को एसी में सफर करने के लिए नि:शुल्क यात्रा पास मिलता रहेगा। उल्लेखनीय है कि रेलवे में वरीयता के आधार पर की-मैन व मेट को एसी थ्री में सफर करने के लिए पास दिया जाता है। इन कर्मचारियों का तबादला होने पर एसी में सफर करने की सुविधा वापस ले ली जाती है। दंड पाने के वाले कर्मचारियों को ड्यूटी पर बाहर जाने पर एसी के बजाय स्लीपर क्लास का पास दिया जाता है।
रेलवे में 24 सौ वेतनमान वाले कर्मचारियों को स्लीपर क्लास में यात्रा करने की सुविधा मिलती है। 28 सौ वेतनमान वालों को एसी थ्री में और 42 सौ वेतनमान वालों को एसी टू में यात्रा करने के लिए पास दिया जाता है। इसी कारण से दंडित अवधि तक कर्मचारियों को एसी का पास मिलना बंद हो जाता है। ट्रेड यूनियन इस नियम का लम्बे समय से विरोध कर रही थी। नियम में संशोधन की मांग की जा रही थी।
रेलवे बोर्ड के उप निदेशक (हित) वी मुरलीधरन ने आदेश में में कहा है कि पदावनत होने वाले कर्मचारी का वेतनमान कम किया जाएगा, लेकिन एसी में सफर करने वाला यात्रा पास पहले की तरह मिलता रहेगा। इसी तरह अस्पताल में भर्ती होने पर एसी रूम में भर्ती कर इलाज की सुविधा मिलती रहेगी।
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