रेलवेकर्मियों को बड़ी राहत
रेलवे ने अपने कर्मचारियों को एक बड़ी राहत दी है। रेलवे ने देश के सभी 17 जोनल को एक आदेश जारी किया है जिसके अनुसार रेलवे के कर्मचारी और उनके परिजन अब गंभीर स्थिति में रेलवे से अनुबंधित अपने नजदीकी किसी भी निजी अस्पताल में भी इलाज करा सकेंगे। कर्मचारी बिना रैफर हुए रेलवे से अनुबंधित अपनी पसंद के किसी भी अस्पताल में अपना इलाज करा सकेंगे। साथ ही रेलवे अस्पताल में इलाज की सुविधा बंद होने से सरकार का खर्च भी बचेगा। इस स्कीम के तहत रेलवे को सिर्फ कर्मचारियों के बीमा प्रीमियम का भुगतान करना होगा। पहले होता ये था कि बीमार होने पर पर पहले रेलवे के अस्पताल जाना पड़ता था और फिर वहां से निजी निजी अस्पताल रैफर किया जाता था। अब रेलवे ने इस क्य्वस्था को बदल दिया है। अब रेलवे के कर्मचारी और उनके परिजन अब गंभीर स्थिति में रेलवे से अनुबंधित अपने नजदीकी किसी भी निजी अस्पताल में सीधे ही भर्ती होकर इलाज करा सकेंगे।
इसके लिए रेलवे ने यूनिवर्सल उम्मीद कार्ड जारी किए हैं, जिन्हें दिखाना होगा। संबंधित निजी अस्पताल उपचार प्रारंभ करने के बाद 24 घंटे या नेक्स्ट वर्किंग डे में मरीज की जानकारी रेलवे अस्पताल को देंगे। रेलवे अस्पताल की ओर से यह बताया जाएगा कि कर्मचारी का उपचार रेलवे अस्पताल में हो सकता है या नहीं? यदि रोग गंभीर है तो उसका निजी अस्पताल में उपचार जारी रहेगा और ज्यादा गंभीर नहीं है तो मरीज अपनी इच्छा से रेलवे अस्पताल आ सकेगा या निजी अस्पताल में ही भर्ती रह सकेगा। मरीज रेलवे अस्पताल में उपचार नहीं करवाता है तो उसे रेलवे गवर्नमेंट हैल्थ सर्विस की तय दरों के मुताबिक भुगतान करेगी।इससे रेलवे कर्मचारियों और उनके परिजनों को समय पर उपचार मिल सकेगा, परेशान नहीं होना पड़ेगा। कागजी कार्रवाई में समय नष्ट नहीं होगा।
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