भरतपुर के रामेश्वरी देवी कन्या महाविद्यालय में महिला अधिकारों पर कार्यशाला हुई। छात्राओं को स्वयं सहायता समूह, दहेज निषेध कानून और POSH Act की जानकारी दी गई।
भरतपुर। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी होना भी है। दहेज प्रथा से लेकर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न तक, महिलाओं से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर जागरूकता के उद्देश्य से रामेश्वरी देवी कन्या महाविद्यालय, भरतपुर में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें छात्राओं को स्वयं सहायता समूहों के गठन, महिला सुरक्षा कानूनों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मधु शर्मा की अध्यक्षता में महिला अध्ययन प्रकोष्ठ के अंतर्गत राजस्थान राज्य महिला नीति-2021 के तहत इस कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें स्वयं सहायता समूह, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न निषेध अधिनियम-2013 और दहेज प्रथा निषेध अधिनियम-1986 विषयों पर चर्चा हुई।
दहेज लेना और देना, दोनों दंडनीय अपराध
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. मधु शर्मा ने कहा कि दहेज लेना और देना दंडनीय अपराध है। उन्होंने छात्राओं को दहेज प्रथा के निषेध की शपथ दिलाई और सुरक्षित, संपन्न तथा समृद्ध समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में सभी की भागीदारी का आह्वान किया।
छोटे समूह से आत्मनिर्भरता की राह
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता भरतपुर की कन्वर्जन ऑफिसर श्रीमती सालो हेम्ब्रोम ने स्वयं सहायता समूहों को महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन का आधार बताया। उन्होंने समूहों के गठन और उनकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार और नाबार्ड के सहयोग से वर्ष 1982 में स्वयं सहायता समूह की परिकल्पना की गई थी। ऐसे समूहों के माध्यम से महिलाएं सामूहिक रूप से बचत कर सकती हैं, बैंक में खाता खुलवा सकती हैं और आवश्यकता पड़ने पर ऋण लेकर अपना उद्यम शुरू कर सकती हैं। इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनने के साथ अपने समाज के विकास में योगदान देने का अवसर मिलता है।
कार्यस्थल पर उत्पीड़न हो तो कहां करें शिकायत?
अपने दूसरे व्याख्यान में श्रीमती सालो हेम्ब्रोम ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम-2013 (POSH Act) के उद्देश्य, प्रावधानों और दंड के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य महिलाओं को कार्यस्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न से बचाना और उनकी सुरक्षा तथा समानता सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचने की स्थिति में टोल फ्री नंबर 1090 और 112 पर संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने आंतरिक समिति के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि घटना की तारीख से तीन महीने के भीतर लिखित शिकायत दी जा सकती है। उनके अनुसार, समिति को 90 दिनों में शिकायत का निस्तारण कर पीड़िता को न्याय दिलाना सुनिश्चित करना चाहिए।
कार्यशाला के अंत में महिला अध्ययन प्रकोष्ठ की संयोजिका डॉ. निशा गोयल ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि सुश्री अंजु मीणा ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर समिति सदस्य डॉ. रेखा देवी शर्मा, डॉ. कविता आचार्य, डॉ. सरोज, डॉ. विनय खण्डेलवाल और हरीश स्वर्णकार मौजूद रहे।
वरिष्ठ संकाय सदस्यों में डॉ. अलका गोयल, श्रीमती साधना शर्मा और श्री जगदीश कुमार उपस्थित रहे। इनके अलावा सुश्री पुनीता खंडूरी, सुश्री अंशुलता बंसल, सुश्री प्रीति मौर्य, सुश्री प्रिया शर्मा, सुश्री निधि अग्रवाल, सुश्री पारुल चौधरी, सुश्री अनुश्री मीना, सुश्री विकाश कुमार और श्रीमती मुक्ता शर्मा सहित अन्य संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।
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