देहरादून में अनुबंध फाउंडेशन के 101वें वरिष्ठजन जीवनसाथी परिचय सम्मेलन में 69 वर्षीय महिला को मिला हमसफर। 50 से 85 वर्ष के बुजुर्गों के लिए सजे इस अनोखे स्वयंवर की पूरी खबर पढ़ें।
बढ़ती उम्र में नया साथी: देहरादून में अनुबंध फाउंडेशन की अनूठी पहल, 50 से 85 वर्ष तक के बुजुर्गों ने की नए जीवन की शुरुआत।
पहली बड़ी सफलता: 69 वर्षीय महिला ने खुद चुना अपना जीवनसाथी, 9 अन्य जोड़ों के रिश्ते भी अंतिम दौर में पहुंचे।
प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी: अनुबंध फाउंडेशन के अध्यक्ष नाटूभाई पटेल, जनरल सेक्रेटरी भूपत भाई सोनी और अग्रवाल समाज के पदाधिकारियों की खास उपस्थिति।
पूरी तरह फ्री और बेदाग: बिना किसी शुल्क और जातिगत बंधनों के, देश के कोने-नेपाल से पहुंचे प्रतिभागी।
प्यार और सम्मान की कोई उम्र नहीं: बुढ़ापे की पगडंडी पर अब कोई नहीं रहेगा अकेला
देहरादून:अक्सर समाज में यह मान लिया जाता है कि जीवन के एक खास पड़ाव के बाद ख्वाहिशें, अपनापन और साथ की चाहत खत्म हो जाती है। लेकिन देहरादून के अग्रवाल भवन में आयोजित अनुबंध फाउंडेशन के 101वें वरिष्ठजन जीवनसाथी परिचय सम्मेलन ने इस रूढ़िवादी सोच को करारा जवाब दिया है।
रविवार को सजे इस अनूठे मंच पर देश के विभिन्न राज्यों से 175 ऐसे महिला-पुरुष (150 पुरुष और 25 महिलाएं) एकत्र हुए, जो या तो अकेले हैं, विधवा/विधुर हैं या तलाकशुदा हैं। मकसद साफ था—जिंदगी के दूसरे दौर में किसी का हाथ थामना और अकेलेपन के सन्नाटे को दूर करना।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अनुबंध फाउंडेशन के अध्यक्ष नाटूभाई पटेल, जनरल सेक्रेटरी भूपत भाई सोनी, सचिव किन्नरी लखानी, कोऑर्डिनेटर हेमा कक्कड़, किरण नायक तथा अग्रवाल समाज के पदाधिकारी अंबरीश अग्रवाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इसके बाद पंजीकरण प्रक्रिया हुई, मंच से सभी का परिचय कराया गया और फिर विवाह के इच्छुक महिला-पुरुषों को आमने-सामने बैठकर एक-दूसरे को समझने का पूरा अवसर दिया गया।
69 साल की उम्र में मिली नई शुरुआत, 9 और रिश्तों पर मुहर तय
फाउंडेशन के अध्यक्ष नाटूभाई पटेल ने जानकारी दी कि इस सम्मेलन का असर बेहद सकारात्मक रहा। कार्यक्रम के दौरान 69 वर्ष की एक महिला ने समझदारी और सहमति से अपने लिए योग्य जीवनसाथी चुना, जिससे दोनों का रिश्ता पक्का हो गया। इसके अलावा, 9 अन्य जोड़ों के बीच बातचीत आखिरी चरण में है और जल्द ही वे एक नई जिंदगी की शुरुआत कर सकते हैं।
परिवारों की बदली सोच: इस सम्मेलन की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि अब परिवार भी अपने बुजुर्गों का दर्द समझ रहे हैं। मंच पर कई ऐसे दृश्य दिखे जहां कोई बहू अपने ससुर के लिए, तो कोई बेटा या बेटी अपने अकेले माता-पिता के लिए हमसफर की तलाश में खुद आगे आए।
बिना किसी फीस और जाति-पाति के बंधन के खुला मंच
इस महासम्मेलन की सबसे बड़ी खूबी इसकी सामाजिक पारदर्शिता थी:
पूरी तरह निःशुल्क: रजिस्ट्रेशन से लेकर नाश्ते और भोजन तक का सारा खर्च संस्था द्वारा उठाया गया, किसी से कोई शुल्क नहीं लिया गया।
जाति के बंधनों से मुक्त: यहां केवल इंसान और उसकी जरूरत को प्राथमिकता दी गई, जिससे अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को एक-दूसरे को समझने का खुला मौका मिला।
नेपाल से लेकर गोवा तक गूंजेगी इस मुहिम की गूंज
देहरादून के अलावा इस आयोजन में उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल से भी लोग शामिल हुए।
अकेलेपन के खिलाफ इस राष्ट्रव्यापी अभियान का कारवां रुकने वाला नहीं है। आयोजकों ने आगामी आयोजनों की तारीखें भी घोषित कर दी हैं:
13 दिसंबर 2026: उदयपुर (राजस्थान)
17 जनवरी 2027: अलवर (राजस्थान)
17 फरवरी 2027: गोवा
अनुबंध फाउंडेशन का यह प्रयास सिर्फ शादियों का आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि सम्मान, अपनापन और साथ की जरूरत उम्र की किसी सीमा में नहीं बंधती। बुढ़ापे के अकेलेपन को पाटने की यह कोशिश हर किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने का एक सार्थक संदेश है।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
अस्पतालों का खौफनाक खेल: ‘सिंगल-यूज़’ उपकरणों से हो रहा था इलाज, सरकार का चला हंटर
घर की इन 5 आम चीजों में छिपा है ‘धीमा जहर’, कहीं आपके परिवार की सेहत पर तो नहीं मंडरा रहा खतरा?
