राजस्थान RERA ने महिमा संसार प्रोजेक्ट के बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी की मनमानी पर सख्त फैसला सुनाया है। जानिए 946 निवासियों के पक्ष में आए इस ऐतिहासिक आदेश की 5 बड़ी बातें।
‘दो साल के संघर्ष के बाद निवासियों के हक में अहम फैसला, बिल्डर के नियंत्रण से लेकर मेंटेनेंस एजेंसी की नियुक्ति तक पर उठे सवाल; RWA के पुनर्गठन और करोड़ों के हिसाब-किताब को लेकर भी जारी हुए निर्देश’
जयपुर: जयपुर के हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट ‘महिमा संसार’ के निवासियों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ने बिल्डर और उसकी चहेती मेंटेनेंस एजेंसी की मनमानी पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। RERA के इस आदेश के बाद अब बिल्डर का प्रोजेक्ट के रखरखाव पर से एकाधिकार खत्म होने की कगार पर है और सारा कंट्रोल असली मालिकों यानी निवासियों के हाथ में आने वाला है।
आइए जानते हैं RERA के इस धमाकेदार फैसले की 5 बड़ी बातें, जो बिल्डर के खेमे में हलचल मचाए हुए हैं:
1. बिल्डर की ‘एकाधिकार’ वाली चाल फेल
RERA ने अपनी तीखी टिप्पणी में साफ कर दिया कि बिल्डर ने अपने ही नियंत्रण वाली फर्जी इकाइयों के जरिए सोसायटी के रखरखाव पर कब्जा जमा रखा था। अब तक निवासियों की चुनी हुई संस्था के बजाय सिर्फ बिल्डर के इशारे पर ही सब कुछ चल रहा था, जिसे प्राधिकरण ने सिरे से नकार दिया है।
2. मेंटेनेंस एजेंसी ‘Finetech’ के चयन पर गंभीर सवाल
प्राधिकरण ने इस बात पर कड़ा एेतराज जताया कि Finetech Facility Management Services Pvt. Ltd. को बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया और बिना निवासियों की सहमति के थोप दिया गया था। बिल्डर और पुरानी सोसायटी इस बात का कोई पुख्ता सबूत या दस्तावेज पेश नहीं कर पाए कि एजेंसी को नियुक्त करने से पहले कोई कानूनी नियम अपनाया गया था या नहीं।
3. अब सिर्फ एक साझा RWA, होगी आर-पार की निगरानी
परियोजना के चारों चरणों के सभी 946 निवासियों को शामिल करते हुए अब एक नई और साझा रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) का पुनर्गठन किया जाएगा। खास बात यह है कि नई RWA ही तय करेगी कि आगे रखरखाव का काम किसे सौंपना है और मेंटेनेंस चार्ज कितना होगा।
4. वित्तीय गड़बड़ियों का होगा कड़ा ऑडिट
बिल्डर को शुरुआत से लेकर अब तक वसूले गए IFMD, क्लब हाउस विकास शुल्क, एस्क्रो कॉर्पस फंड और CAM शुल्क का पाई-पाई का हिसाब देना होगा। Finetech द्वारा वसूली गई रकम का भी पूरा हिसाब होगा। इसके बाद एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से पूरे खर्च का ऑडिट कराया जाएगा और बचा हुआ सारा पैसा नई सोसायटी को ट्रांसफर करना होगा।
5. पार्किंग, ओसी (OC) और कन्वेयंस डीड़ पर भी बड़ा निर्देश
पार्किंग का खेल खत्म: स्वीकृत नक्शों के खिलाफ जाकर बिल्डर अब तीसरे पक्ष को पार्किंग स्पेस आवंटित नहीं कर पाएगा।
कन्वेयंस डीड़ और क्लब हाउस: क्लब हाउस समेत सभी साझा क्षेत्रों का मालिकाना हक (कन्वेयंस डीड़) अब पुनर्गठित RWA के पक्ष में करना होगा।
फायर और एनवायरनमेंट क्लियरेंस: बिल्डर को 23 मई 2025 को मिले ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) की कमियों को दूर करने के साथ-साथ Fire NOC और Environmental Clearance भी सोसायटी को सौंपने होंगे।
निवासियों की दो साल की लंबी जंग लाई रंग महिमा संसार फेज II स्प्रिंग विला रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसाइटी के सचिव अरुण उरेसर ने बताया कि बिल्डर और उसकी नॉमिनेटेड RWA की प्रताड़ना के खिलाफ निवासियों ने करीब दो साल तक कड़ा संघर्ष किया है। RERA के इस फैसले से अब निवासियों को खुलकर सांस लेने का मौका मिलेगा और पारदर्शिता का नया दौर शुरू होगा।
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