महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज अग्रोहा में 2026 बैच के डीएनबी रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड को बेसिक पे तक सीमित करने पर डीएमए इंडिया ने पुनर्विचार और राहत की मांग उठाई।
हिसार। महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज (MAMC), अग्रोहा में पोस्ट-डिप्लोमा डीएनबी रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में कटौती का मामला सामने आया है। वर्ष 2026 के बैच के स्टाइपेंड को केवल मूल वेतन (बेसिक पे) तक सीमित करने संबंधी निर्णय पर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने हिसार की विधायक एवं ओपी जिंदल ग्रुप की चेयरपर्सन एमेरिटस श्रीमती सावित्री देवी जिंदल से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप और वर्तमान बैच को राहत दिलाने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने सावित्री देवी जिंदल को औपचारिक पत्र सौंपकर स्टाइपेंड संबंधी निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। एसोसिएशन का कहना है कि रेजिडेंट डॉक्टरों ने प्रवेश से पहले उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपने करियर के साथ आर्थिक भविष्य की भी योजना बनाई थी। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने और संस्थान में कार्यभार संभालने के बाद भुगतान की व्यवस्था में बदलाव से उनके सामने आर्थिक अनिश्चितता पैदा हो गई है।
प्रवेश से पहले ₹1.10 लाख प्रतिमाह स्टाइपेंड की जानकारी मिलने का दावा
डीएमए इंडिया के अनुसार, संबंधित रेजिडेंट डॉक्टरों ने प्रवेश से पहले संस्थान के एकाउंट्स सेक्शन से स्टाइपेंड के बारे में जानकारी ली थी। एसोसिएशन का दावा है कि उस समय उन्हें लगभग ₹1.10 लाख प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलने की जानकारी दी गई थी।
वर्ष 2026 बैच की काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया 2 जुलाई से 3 अगस्त 2026 के बीच पूरी हुई। इसके बाद 13 अक्टूबर को स्टाइपेंड को केवल बेसिक पे तक सीमित करने संबंधी संशोधित सूचना जारी की गई। एसोसिएशन ने इसी समयक्रम को आधार बनाते हुए वर्तमान बैच के लिए निर्णय पर दोबारा विचार करने की मांग उठाई है।
आवास से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक पर पड़ सकता है असर
एसोसिएशन का कहना है कि रेजिडेंट डॉक्टर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका स्टाइपेंड आवास, दैनिक खर्च और अन्य वित्तीय जरूरतों से जुड़ा होता है। प्रवेश के समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर आर्थिक योजना बनाने वाले डॉक्टरों के लिए बाद में भुगतान की शर्तों में बदलाव परेशानी का कारण बन सकता है।
डीएमए इंडिया ने संबंधित आदेश की प्रभावी तिथि, लागू नियमों और वर्तमान बैच पर संशोधित व्यवस्था की प्रयोज्यता को लेकर स्पष्टता मांगी है। एसोसिएशन का आग्रह है कि निर्णय लेते समय प्रवेश के समय उपलब्ध जानकारी और मौजूदा रेजिडेंट डॉक्टरों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाए।
वर्तमान बैच को राहत देने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य रूप से तीन मांगें रखीं। पहली, वर्ष 2026 के पोस्ट-डिप्लोमा डीएनबी रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड संबंधी निर्णय पर पुनर्विचार कर उन्हें राहत दी जाए। दूसरी, प्रवेश से पहले उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर प्रवेश लेने वाले डॉक्टरों की उचित अपेक्षाओं पर विचार किया जाए। तीसरी, लागू नियमों और विनियमों के अधीन संशोधित नीति को भविष्य के बैचों से लागू करने की संभावना पर विचार किया जाए। एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर मामले का निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान निकाला जाएगा, जिससे वर्तमान बैच के डॉक्टरों की आर्थिक अनिश्चितता दूर हो सके।
डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टरों के हितों, उनके भविष्य और पारदर्शी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उचित मंच पर उठाना एसोसिएशन की प्राथमिकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित पक्ष आपसी संवाद के माध्यम से व्यावहारिक और न्यायसंगत समाधान निकालेंगे। इस दौरान डॉ. दीक्षा, डॉ. हनी दलाल, डॉ. श्रेया जाधव और डॉ. निकिता चौधरी भी उपस्थित रहीं।
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