रेलवे ने ड्यूटी के दौरान घायल होने वाले कर्मचारियों के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब आईओडी (Injury on Duty) फॉर्म मिलना अनिवार्य होगा और गवाहों की शर्त भी खत्म कर दी गई है।
नई दिल्ली: रेलवे कर्मचारियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। अब ड्यूटी के दौरान या घर से निकलते वक्त रास्ते में किसी भी दुर्घटना का शिकार होने वाले रेलकर्मियों को इलाज और छुट्टी के लिए ऑफिस के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। रेलवे बोर्ड ने नियमों में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव किया है, जिससे कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मुश्किलें चुटकियों में हल हो जाएंगी।
क्या है नया और आसान नियम?
अब घायल रेलकर्मी को केवल अपने निगरानी अधिकारी (Supervising Officer) से आईओडी (इंजरी ऑन ड्यूटी – Injury on Duty) फॉर्म लेना होगा। इस फॉर्म में हादसे से जुड़ी जानकारी भरकर वापस अधिकारी को सौंपनी होगी। खास बात यह है कि अब संबंधित अधिकारी इस फॉर्म को देने से मना नहीं कर सकते, उन्हें कर्मचारी को फॉर्म उपलब्ध कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
रास्ते का हादसा भी माना जाएगा ‘ड्यूटी ऑन आवर’
रेलवे बोर्ड के नए प्रावधानों के मुताबिक, यदि कोई कर्मचारी घर से अपनी ड्यूटी के लिए निकला है या फिर ड्यूटी खत्म होने के बाद वापस घर लौट रहा है और इस दौरान रास्ते में कोई दुर्घटना हो जाती है, तो उसे ड्यूटी के दौरान हुआ हादसा (IOD) ही माना जाएगा। इस स्थिति में मिलने वाला मेडिकल अवकाश कर्मचारी के सामान्य उपार्जित अवकाश (Earned Leave) में नहीं जोड़ा जाएगा, यानी उनकी छुट्टियां सुरक्षित रहेंगी।
गवाहों का झंझट खत्म, लेकिन लापरवाही पर गिरेगी गाज
सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि पहले इस तरह के मामलों में क्लेम या छुट्टी पाने के लिए दो गवाहों का होना अनिवार्य होता था, जिसे नए आदेश के तहत पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
हालांकि, रेलवे प्रशासन ने इसके साथ एक सख्त चेतावनी भी जारी की है। यदि किसी कर्मचारी ने आईओडी (IOD) से जुड़ी कोई भी गलत या फर्जी जानकारी दी, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा और संबंधित कर्मचारी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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