केंद्र सरकार ने कारों में AEBS, लेन कीपिंग, ड्राइवर अलर्ट और चाइल्ड सीट सुरक्षा से जुड़े नए मानकों का ड्राफ्ट जारी किया। जानें प्रस्तावित तारीखें और सुझाव भेजने का तरीका।
नई दिल्ली। कार चलाते समय टक्कर का खतरा हो तो गाड़ी खुद ब्रेक लगा दे, अनजाने में लेन बदलने पर ड्राइवर को अलर्ट करे और नींद या कम होती सतर्कता के संकेत मिलने पर चेतावनी दे—आने वाले वर्षों में कारों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। केंद्र सरकार ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मोटर वाहन नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, अभी इन प्रावधानों को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। सरकार ने ड्राफ्ट पर 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। सुझावों पर विचार के बाद ही आगे का फैसला होगा।
टक्कर का खतरा भांपकर ब्रेक लगाएगी कार
प्रस्तावित बदलावों में सबसे अहम ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS) है। यह तकनीक सामने किसी वाहन या बाधा से टक्कर की आशंका होने पर ड्राइवर को चेतावनी देने और जरूरत पड़ने पर अपने आप ब्रेक लगाने में मदद करती है। ड्राफ्ट के मुताबिक, M1 श्रेणी की कारों में इस सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। नए मॉडल्स के लिए 1 अक्टूबर 2030 और सभी मॉडल्स के लिए 1 अक्टूबर 2032 की तारीख प्रस्तावित की गई है।
वहीं, 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाले M1 और N1 श्रेणी के वाहनों में यदि AEBS लगाया गया है, तो उसे निर्धारित AIS-185 मानकों के अनुरूप होना होगा। इसका अर्थ यह नहीं है कि 2028 से इन दोनों श्रेणियों के प्रत्येक वाहन में AEBS लगाना अनिवार्य हो जाएगा।
टैक्सी और ट्रांसपोर्ट कारों में भी होंगे बदलाव
सरकार ने टैक्सी और ट्रांसपोर्ट के रूप में पंजीकृत M1 श्रेणी के वाहनों के लिए भी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय प्रस्तावित किए हैं। इनके तहत 1 अक्टूबर 2029 से इमरजेंसी लेन कीपिंग सिस्टम (ELKS) अनिवार्य करने की तैयारी है। यह सिस्टम कार के अनजाने में अपनी लेन से बाहर जाने पर ड्राइवर को सतर्क करने और गाड़ी को लेन में बनाए रखने में मदद करता है। इसी तारीख से ऐसे वाहनों में ड्राइवर को नींद आने या उसकी सतर्कता कम होने पर चेतावनी देने वाला सिस्टम भी अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इन ट्रांसपोर्ट कारों में ऑटोमैटिक कमांड स्टीयरिंग फंक्शनैलिटी (ACSF) से जुड़े प्रावधान भी प्रस्तावित हैं। इस तकनीक के लिए निर्धारित AIS-193 मानकों का पालन करना होगा।
स्टीयरिंग से लेकर बच्चों की सीट तक, बदलेंगे सुरक्षा मानक
ड्राफ्ट में स्टीयरिंग से जुड़े नियमों को भी सख्त करने की तैयारी है। 1 अक्टूबर 2027 से बनने वाले ज्यादातर मोटर वाहनों में स्टीयरिंग घुमाने के लिए लगने वाले प्रयास यानी स्टीयरिंग एफर्ट के नए मानक लागू करने का प्रस्ताव है। इन्हें AIS-193 के अनुरूप रखना होगा। हालांकि, बिना स्टीयरिंग व्हील वाले कुछ तीन-पहिया वाहन, मोटरसाइकिल और दिव्यांगजनों के इस्तेमाल वाले इनवैलिड कैरिज को इस प्रावधान से बाहर रखने का प्रस्ताव है। जिन M1 वाहनों में ACSF दिया गया है, उन्हें भी निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। बच्चों की सुरक्षा के लिए कार में चाइल्ड सीट लगाने से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। इनमें ISOFIX एंकरिंग, टॉप टेथर एंकरिंग और i-Size सीटिंग पोजिशन के मानक शामिल हैं।
इन सिस्टम्स से लैस वाहनों के लिए निर्धारित AIS-182 मानकों के पालन की तारीखें इस प्रकार प्रस्तावित हैं:
नए मॉडल्स: 1 अक्टूबर 2027 से
सभी मॉडल्स: 1 अक्टूबर 2028 से
हादसे में सामान भी नहीं बनेगा चोट की वजह
कार में रखा सामान टक्कर के दौरान आगे की ओर उछलकर यात्रियों को चोट पहुंचा सकता है। इस जोखिम को कम करने के लिए ड्राफ्ट में लगेज रिटेंशन से जुड़े मानकों का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके तहत नए कार मॉडल्स के लिए 1 अप्रैल 2028 और सभी मॉडल्स के लिए 1 अक्टूबर 2028 से निर्धारित मानकों का पालन करने की तारीख प्रस्तावित की गई है।
अभी अंतिम फैसला नहीं, सरकार को भेज सकते हैं सुझाव
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का यह ड्राफ्ट 19 अक्टूबर 2026 की तारीख वाला है और 21 अक्टूबर को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित हुआ। सरकार ने संबंधित पक्षों और आम लोगों से 30 दिनों के भीतर आपत्तियां व सुझाव मांगे हैं।
सुझाव परिवहन भवन, संसद मार्ग, नई दिल्ली के पते पर या comments-morth@gov.in पर भेजे जा सकते हैं।
फिलहाल ये सभी बदलाव प्रस्तावित हैं, लागू नियम नहीं। यदि सरकार इन्हें मंजूरी देती है, तो आने वाले वर्षों में कारों में टक्कर से बचाव, लेन में बने रहने, ड्राइवर की सतर्कता, बच्चों की सीट और सामान की सुरक्षा से जुड़े मानक चरणबद्ध तरीके से बदल सकते हैं।
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