सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ के नकली नोट मिलने के बाद फरार मैनेजर गिरफ्तार हुआ है। अब NIA नकली नोटों के स्रोत और पूरे नेटवर्क की पड़ताल करेगी।
सहारनपुर। जिस जगह पर करोड़ों की करेंसी को सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, उसी PNB करेंसी चेस्ट के भीतर 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलना अब सिर्फ बैंक का फर्जीवाड़ा नहीं रह गया है। मामला उस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां एक गिरफ्तार बैंक मैनेजर से पूछताछ के बाद यह पता लगाया जाना है कि आखिर नकली नोटों का खेल बैंक के भीतर तक किसने पहुंचाया?
फरार चल रहे PNB के पूर्व मैनेजर अमित कुमार को NIA ने गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन इस गिरफ्तारी के साथ कहानी खत्म होने के बजाय अब असली जांच शुरू होती दिख रही है। एजेंसी के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नकली नोट चेस्ट में कैसे पहुंचे, बल्कि यह भी है कि बंडलों के ऊपर असली और अंदर नकली नोट भरने का पूरा खेल किसकी जानकारी में चल रहा था।
बाहर से सब ठीक… अंदर करोड़ों का खेल
29 अगस्त को जब सहारनपुर के सदर बाजार स्थित PNB की करेंसी चेस्ट को लेकर सूचना मिली, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि बंडलों के भीतर इतना बड़ा खेल छिपा है। जांच आगे बढ़ी तो बंडलों की तस्वीर ही बदल गई। ऊपर असली नोट रखे गए थे, जबकि अंदर जाली नोट भरे हुए थे। गिनती हुई तो रकम छोटी-मोटी नहीं, बल्कि करीब 17.29 करोड़ रुपये निकली। यहीं से सबसे बड़ा सवाल पैदा हुआ—इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट बैंक की चेस्ट तक पहुंचने से पहले कितने हाथों से गुजरे?
और अगर बंडलों को इस तरह तैयार किया गया था कि ऊपर से वे असली दिखाई दें, तो यह काम किसी सामान्य स्तर की गलती से हुआ या इसके पीछे बाकायदा एक तय सिस्टम काम कर रहा था?
मैनेजर भागा तो शक और गहरा गया
मामला खुलने के बाद बैंक प्रबंधन ने तीन कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आने पर उन्हें निलंबित किया। दूसरी तरफ बैंक मैनेजर अमित कुमार फरार हो गया। यही फरारी जांच के लिए एक अहम कड़ी बन गई। NIA की लखनऊ टीम ने उसकी तलाश शुरू की और तकनीकी सर्विलांस तथा कॉल डिटेल के जरिए उसकी लोकेशन तक पहुंची। पता चला कि वह चंडीगढ़ में अपने रिश्तेदार के घर छिपा हुआ है। सोमवार रात टीम ने दबिश देकर उसे पकड़ लिया।
अब जांच एजेंसी के लिए सबसे अहम कड़ी यही गिरफ्तारी है। क्योंकि जिस व्यक्ति पर बैंक की जिम्मेदारी थी, उसके पास इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े कई सवालों के जवाब होने की संभावना है।
असली खेल चेस्ट के बाहर भी हो सकता है
17 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकली करेंसी का मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा बैंक की चारदीवारी से बाहर भी जा रहा है। जांच एजेंसियां इस आशंका को भी देख रही हैं कि नकली नोटों का यह नेटवर्क किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय या सीमावर्ती सिंडिकेट से जुड़ा हो सकता है। हालांकि इस कड़ी की अभी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इतनी बड़ी रकम के सामने आने के बाद एजेंसियां इसके संभावित स्रोत और सप्लाई चैन को खंगाल रही हैं।
मतलब साफ है—अगर नोट बैंक तक पहुंचे हैं तो उनके पीछे कोई स्रोत भी होगा और बैंक से आगे उनका कोई इस्तेमाल भी हुआ होगा।
अब बैंक के खातों में खोजा जाएगा नकली नोटों का रास्ता
जांच का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव बैंक के खाते और कैश ट्रांजेक्शन हैं। बड़े लेनदेन वाले खातों को खंगालकर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि किस खाते से पैसा निकला, कब निकला और उसके बाद वह कहां गया। इसके लिए कैश निकासी का रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, चेक, अकाउंट स्टेटमेंट और दूसरे बैंक दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
यानी अब जांच सिर्फ करेंसी चेस्ट में मिले नोटों तक सीमित नहीं रहेगी। पैसे के आने-जाने का रास्ता खोजकर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि 17.29 करोड़ के इस खेल में बैंक के अंदर और बाहर कौन-कौन जुड़ा था।
एक गिरफ्तारी के बाद खुल सकते हैं कई चेहरे
अमित कुमार की गिरफ्तारी इस मामले में फिलहाल सबसे बड़ी कड़ी है। लेकिन अगर पूछताछ में नोटों के स्रोत, बंडलों की तैयारी और उनके बैंक तक पहुंचने की कहानी सामने आती है, तो जांच कई और लोगों तक पहुंच सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 17.29 करोड़ की नकली करेंसी सिर्फ बैंक के भीतर का फर्जीवाड़ा थी या इसके पीछे कई राज्यों तक फैला कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? अब इस सवाल का जवाब गिरफ्तार मैनेजर और बैंक के उन रिकॉर्ड में छिपा है, जिन्हें NIA खंगाल रही है।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
‘डरपोक जज कहलाना मंजूर नहीं, मरना पसंद करूंगा’, माफिया के दबाव के बीच जज ने सुनाई नदीम को फांसी
