NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट में बड़ा खुलासा। आरोप है कि NTA के एक्सपर्ट्स ने पेपर तैयार करते समय सवाल याद कर होटल में लिखे और WhatsApp-Telegram के जरिए छात्रों तक पहुंचाए।
नई दिल्ली। अब तक माना जा रहा था कि NEET-UG 2026 का पेपर परीक्षा से ठीक पहले कहीं से बाहर निकला होगा, लेकिन CBI की जांच ने कहानी ही बदल दी है। एजेंसी का दावा है कि पेपर लीक की शुरुआत वहीं से हुई, जहां इसकी सुरक्षा सबसे मजबूत मानी जाती थी। आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी संभाल रहे NTA के कुछ एक्सपर्ट्स ने सवाल कंप्यूटर स्क्रीन पर देखते ही उन्हें याद करना शुरू कर दिया। ऑफिस से निकलने के बाद होटल पहुंचते ही वही सवाल कागज पर उतारे गए और यहीं से शुरू हुआ वह नेटवर्क, जिसने बाद में लाखों छात्रों की परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।
CBI की 94 पेज की चार्जशीट के मुताबिक यह कोई अचानक हुई चोरी नहीं थी, बल्कि महीनों पहले रची गई ऐसी साजिश थी, जिसमें कथित तौर पर NTA से जुड़े लोग, निजी कोचिंग संचालक, बिचौलिए और कुछ अभ्यर्थी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। एजेंसी का दावा है कि परीक्षा से पहले ही इन लोगों के बीच संपर्क, मुलाकातें और पैसों का लेन-देन शुरू हो चुका था।
परीक्षा से महीनों पहले शुरू हो गई थी तैयारी
चार्जशीट के मुताबिक, कथित साजिश परीक्षा से ठीक पहले नहीं, बल्कि 2025 के आखिर और 2026 की शुरुआत में ही आकार लेने लगी थी। एजेंसी का दावा है कि कुछ कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने परीक्षा से कई महीने पहले ही NTA के तीन एक्सपर्ट्स से संपर्क स्थापित कर लिया था। इसके बाद लगातार मुलाकातें, बातचीत और पैसों के लेन-देन का सिलसिला चलता रहा।
ऑफिस से होटल… फिर बाहर निकलते थे सवाल
CBI के अनुसार, पेपर तैयार करने के लिए NTA कार्यालय पहुंचने वाले कुछ एक्सपर्ट्स दिनभर प्रश्नों पर काम करने के बाद होटल लौटते थे। वहां वे अपनी याददाश्त के आधार पर सवाल पर्चियों पर लिखते थे। बाद में संबंधित NCERT अध्याय और पैराग्राफ चिन्हित किए जाते, ताकि छात्रों को वही विषय पढ़ाकर परीक्षा में बढ़त दिलाई जा सके।
जांच में यह भी सामने आया कि NTA कार्यालय में रफ वर्क के लिए दिए गए सादे कागजों का भी कथित दुरुपयोग किया गया। चार्जशीट के अनुसार, एक एक्सपर्ट ने 135 केमिस्ट्री प्रश्न और उनके विकल्प तक नोट कर लिए थे।
चार्जशीट में किन पर लगे आरोप?
CBI ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें NTA के तीन एक्सपर्ट्स के अलावा निजी कोचिंग संचालक, बिचौलिए और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग शामिल हैं।
चार्जशीट में जिन तीन NTA एक्सपर्ट्स का उल्लेख है, वे हैं—
- मनीषा गुरुनाथ मंधारे
- पी. वी. कुलकर्णी
- मनीषा संजय हवलदार
एजेंसी का आरोप है कि इन तीनों ने अपने पद का दुरुपयोग कर प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग की।
कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी जांच के घेरे में
चार्जशीट में पुणे के डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी के COO तेजस हर्षदकुमार शाह, रेणुकाई करियर सेंटर के मैनेजिंग पार्टनर शिवराज मोटेगांवकर और सिद्धिविनायक हॉस्पिटल के संचालक डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे का भी उल्लेख है।
CBI का आरोप है कि इन लोगों ने कथित तौर पर NTA के बाहर पूरे नेटवर्क का संचालन किया और लीक सामग्री छात्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी के मुताबिक, पूरे खेल का मकसद अवैध कमाई करना और कुछ कोचिंग संस्थानों के परिणाम बेहतर दिखाना था।
खाली चेक और सर्टिफिकेट भी बने ‘गारंटी’
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। CBI के अनुसार, एक आरोपी ने लीक पेपर हासिल करने के बाद अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र और हस्ताक्षर किया हुआ खाली चेक सुरक्षा के तौर पर सौंपा था। एजेंसी का कहना है कि यह पूरे सौदे के आर्थिक पहलू को दर्शाता है।
बैंक खाते, लॉकर और डीमैट अकाउंट फ्रीज
जांच के दौरान CBI ने आरोपियों के कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट अकाउंट भी फ्रीज किए हैं। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की गई है।
दोष सिद्ध हुआ तो हो सकती है कड़ी सजा
CBI ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, सबूत मिटाने और भ्रष्टाचार समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
यदि अदालत में आरोप सिद्ध होते हैं तो भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है। वहीं लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत 7 से 10 वर्ष की जेल और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
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