आगरा कैंट स्टेशन पर रेलवे अफसर नरेंद्र चाहर से मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है। उनकी पत्नी ने दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर आत्महत्या की चेतावनी दी, जबकि 30 शहरों में रेलकर्मियों का प्रदर्शन जारी है।
आगरा: आगरा रेलवे स्टेशन पर डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट नरेंद्र चाहर को प्लेटफॉर्म पर घसीट-घसीटकर पीटने का मामला अब सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं रहा। वायरल वीडियो ने पूरे रेलवे महकमे में ऐसा गुस्सा भर दिया है कि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के रेलकर्मी सड़कों पर उतर आए हैं।
मंगलवार को आगरा, मथुरा, झांसी, दिल्ली, कोटा समेत करीब 30 शहरों में रेलवे कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। आगरा में हजारों कर्मचारियों ने डीआरएम कार्यालय के बाहर आरपीएफ के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान पीड़ित अधिकारी की बहन रेलवे ट्रैक पर उतर गई और ट्रेनें रोकने की चेतावनी दे डाली।
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पत्नी की चेतावनी ने बढ़ाया दबाव
आंदोलन के बीच सबसे भावुक तस्वीर तब सामने आई, जब नरेंद्र चाहर की पत्नी हरेंद्री चाहर मीडिया के सामने फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने कहा, ‘मेरे पति को जिस तरह सरेआम घसीटकर पीटा गया, उसका वीडियो तक नहीं देखा जा रहा। अगर दोषी आरपीएफ जवानों को नौकरी से नहीं निकाला गया और गिरफ्तार नहीं किया गया तो मैं अपनी जान दे दूंगी।’ उनके इस बयान के बाद आंदोलन ने और ज्यादा तूल पकड़ लिया।
नरेंद्र चाहर बोले- अगर मैं दोषी होता तो जेल में होता
घायल नरेंद्र चाहर ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘अगर मैं रिश्वत लेते पकड़ा जाता तो उसी दिन जेल भेज दिया जाता। लेकिन जिन्होंने मुझे घसीटा, पीटा, क्या उनके लिए कानून अलग है? गिरफ्तारी होगी तभी रेल चलेगी।’
क्या हुआ था उस दिन?
12 जुलाई को आगरा कैंट स्टेशन पर अमृतसर-हीराकुंड एक्सप्रेस से उतरी एक महिला यात्री ट्रेन छूटने पर दौड़ने लगी। हादसे से बचाने के लिए डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट नरेंद्र चाहर ने वॉकी-टॉकी से लोको पायलट को सूचना देकर ट्रेन रुकवा दी। इसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद आरपीएफ कर्मी ने महिला को चेन पुलिंग के आरोप में रोक लिया। नरेंद्र चाहर ने बताया कि ट्रेन उन्होंने रुकवाई थी, लेकिन इसी बात पर विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि कुछ ही मिनटों में कई आरपीएफ जवान मौके पर पहुंच गए और नरेंद्र चाहर को पकड़कर प्लेटफॉर्म पर करीब 300 मीटर तक घसीटा। इस दौरान उनके साथ मारपीट भी की गई।
मेडिकल रिपोर्ट ने खोली पोल
घटना के बाद आई मेडिकल रिपोर्ट में नरेंद्र चाहर के बाएं कान का पर्दा फटने की पुष्टि हुई है। यही रिपोर्ट अब रेलवे कर्मचारियों के आंदोलन का बड़ा आधार बन गई है।
चार जवान सस्पेंड, लेकिन आंदोलन नहीं रुका
रेलवे ने आरपीएफ के एएसआई मेघराज मीणा, बालकिशन और कॉन्स्टेबल बदन सिंह व जितेंद्र को निलंबित कर दिया है। तीन वरिष्ठ अधिकारियों की जांच समिति भी गठित कर दी गई है।
लेकिन रेलवे यूनियनों का कहना है कि सस्पेंशन नहीं, गिरफ्तारी चाहिए। जब तक दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।
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