जयपुर में एसीबी ने नगर निगम के जेईएन संजय कुमार बैरवा को 80 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोप है कि निर्माणाधीन मकान को सील नहीं करने के बदले 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।
जयपुर। मकान का निर्माण रुकवाने और दोबारा सील करने का डर दिखाकर रिश्वत वसूलने का खेल आखिरकार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के जाल में फंस गया। जयपुर नगर निगम के एक कनिष्ठ अभियंता (JEN) को सोमवार को 80 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। आरोपी ने कथित तौर पर निर्माणाधीन मकान को सील नहीं करने और काम बिना रुकावट जारी रखने के बदले 2 लाख रुपये की मांग की थी।
एसीबी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी संजय कुमार बैरवा नगर निगम जयपुर में जेईएन के पद पर कार्यरत है। शिकायतकर्ता ने अपने पुराने जर्जर मकान को तोड़कर नया मकान बनाने के लिए सिविल लाइंस जोन में भवन निर्माण की अनुमति ली थी। करीब चार महीने बाद मकान की सील हटाई गई और बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर तथा प्रथम तल के निर्माण की विधिवत स्वीकृति भी मिल गई थी।
इसके बावजूद 3 जून को आरोपी जेईएन अपने साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दीनदयाल को लेकर निर्माण स्थल पर पहुंचा। आरोप है कि दोनों ने मकान को दोबारा सील करने, गार्ड बैठाने और निर्माण कार्य बंद कराने की धमकी देकर परिवादी पर दबाव बनाया। इसके बदले जेईएन ने स्वयं और तत्कालीन उपायुक्त (DC) सुनील बैरवा के नाम पर 2 लाख रुपये रिश्वत की मांग की।
परिवादी की शिकायत मिलने पर एसीबी ने 4 जून को गोपनीय सत्यापन कराया। जांच में 1 लाख रुपये रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसी दौरान आरोपी के कहने पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दीनदयाल ने 20 हजार रुपये की पहली किस्त भी ले ली थी। इसके बाद शेष रकम के लिए लगातार दबाव बनाया जाता रहा।
सोमवार को एसीबी ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए जाल बिछाया। आरोपी जेईएन ने अपनी कार का लॉक खुलवाकर शिकायतकर्ता से 80 हजार रुपये डैशबोर्ड में रखवाए और कार को फिर से लॉक कर दिया। जैसे ही तय संकेत मिला, एसीबी की टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।
तलाशी के दौरान कार के डैशबोर्ड से 80 हजार रुपये बरामद हुए। रासायनिक परीक्षण में आरोपी के हाथ धुलवाने पर उनका रंग गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। इसके अलावा उसके पर्स से 27,400 रुपये की संदिग्ध नकदी भी बरामद हुई है।
एसीबी अब यह भी जांच कर रही है कि रिश्वत मांगने और वसूली के इस पूरे मामले में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की क्या भूमिका रही। आरोपी से पूछताछ जारी है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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